Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Jul 2016 · 1 min read

एक दोस्त पुराना

वो जो एक दोस्त पुराना आ गया
याद फिर गुजरा जमाना आ गया
*************************
क्यूं न कैद कर लूं इन लम्हों को
वो जो आये मुस्कराना आ गया
************************
कपिल कुमार
24/07/2016

Language: Hindi
1 Comment · 510 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
हाथी के दांत
हाथी के दांत
Dr. Pradeep Kumar Sharma
जीवन मर्म
जीवन मर्म
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
ग़म
ग़म
Harminder Kaur
तू है एक कविता जैसी
तू है एक कविता जैसी
Amit Pathak
फूल मुरझाए के बाद दोबारा नई खिलय,
फूल मुरझाए के बाद दोबारा नई खिलय,
Krishna Kumar ANANT
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Jitendra Kumar Noor
सुखों से दूर ही रहते, दुखों के मीत हैं आँसू।
सुखों से दूर ही रहते, दुखों के मीत हैं आँसू।
डॉ.सीमा अग्रवाल
मशक-पाद की फटी बिवाई में गयन्द कब सोता है ?
मशक-पाद की फटी बिवाई में गयन्द कब सोता है ?
महेश चन्द्र त्रिपाठी
प्रारब्ध भोगना है,
प्रारब्ध भोगना है,
Sanjay ' शून्य'
माधव मालती (28 मात्रा ) मापनी युक्त मात्रिक
माधव मालती (28 मात्रा ) मापनी युक्त मात्रिक
Subhash Singhai
बैर भाव के ताप में,जलते जो भी लोग।
बैर भाव के ताप में,जलते जो भी लोग।
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
फूक मार कर आग जलाते है,
फूक मार कर आग जलाते है,
Buddha Prakash
* धीरे धीरे *
* धीरे धीरे *
surenderpal vaidya
दो शे'र
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
अपने
अपने "फ़ास्ट" को
*Author प्रणय प्रभात*
बहारों कि बरखा
बहारों कि बरखा
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
यूं ही हमारी दोस्ती का सिलसिला रहे।
यूं ही हमारी दोस्ती का सिलसिला रहे।
सत्य कुमार प्रेमी
"रंग और पतंग"
Dr. Kishan tandon kranti
नूतन सद्आचार मिल गया
नूतन सद्आचार मिल गया
Pt. Brajesh Kumar Nayak
ग़ज़ल/नज़्म - इश्क के रणक्षेत्र में बस उतरे वो ही वीर
ग़ज़ल/नज़्म - इश्क के रणक्षेत्र में बस उतरे वो ही वीर
अनिल कुमार
3051.*पूर्णिका*
3051.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
डर डर के उड़ रहे पंछी
डर डर के उड़ रहे पंछी
डॉ. शिव लहरी
// जय श्रीराम //
// जय श्रीराम //
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बचपन के पल
बचपन के पल
Soni Gupta
*प्रेम का सिखला रहा, मधु पाठ आज वसंत है(गीत)*
*प्रेम का सिखला रहा, मधु पाठ आज वसंत है(गीत)*
Ravi Prakash
मां
मां
Irshad Aatif
रोज गमों के प्याले पिलाने लगी ये जिंदगी लगता है अब गहरी नींद
रोज गमों के प्याले पिलाने लगी ये जिंदगी लगता है अब गहरी नींद
कृष्णकांत गुर्जर
शायद यह सोचने लायक है...
शायद यह सोचने लायक है...
पूर्वार्थ
वैसे जीवन के अगले पल की कोई गारन्टी नही है
वैसे जीवन के अगले पल की कोई गारन्टी नही है
शेखर सिंह
एक न एक दिन मर जाना है यह सब को पता है
एक न एक दिन मर जाना है यह सब को पता है
Ranjeet kumar patre
Loading...