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16 Dec 2022 · 1 min read

एक इंतज़ार दीजिए नई गज़ल विनीत सिंह शायर के कलम से

आँखों से अपनी यूँ ही शिकार कीजिए
हम गरीब लोग हैं हमें मार दीजिए

मरते हुए इंसान की ख़्वाइश है आख़िरी
इक बार लब से अपने पुकार दीजिए

आख़िरी सलाम में जलता हुआ ये ख़त
तोहफ़ा ये मुझे आप बार बार दीजिए

जीना हुआ मुश्किल उम्मीद के बगैर
आँखों को मेरी एक इंतज़ार दीजिए

किसी और से सही पर पूछा है मेरा हाल
परवर दिगार फिर मुझे बीमार कीजिए

~विनीत सिंह
Vinit Singh Shayar

Language: Hindi
310 Views
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