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10 Apr 2023 · 1 min read

“उम्र जब अल्हड़ थी तब

“उम्र जब अल्हड़ थी तब
उसके तक़ाज़े थे अलग।
एक दिल दिन भर में बीसों
बार खो देता था मैं।।”

◆प्रणय प्रभात◆

1 Like · 264 Views
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