Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Mar 2024 · 1 min read

उन्हें दिल लगाना न आया

उन्हें दिल्लगी आई, दिल लगाना न आया।
हमने हरदम अपना माना जिसे, वही कर गया पराया।

ये खेल दिल को महंगा पड़ा, जिसको जीतना चाहा उसने ही हमको हराया।

इनको आता है बातें बनाना, न जाने कितनी बार झूठा ख्वाब हमें दिखाया।

इन्हे बेवफा कहूं तो कैसे, जब मन किया तब दिल में बसा लिया और जब मन भर गया तब नजरों से गिराया।

मेरी आंखों में आसूं है, पर अब माफ न करूंगी तुमको और निगाहों से हमने अगर सावन बरसाया।

3 Likes · 701 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
शिक्षित बनो शिक्षा से
शिक्षित बनो शिक्षा से
gurudeenverma198
परों को खोल कर अपने उड़ो ऊँचा ज़माने में!
परों को खोल कर अपने उड़ो ऊँचा ज़माने में!
धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफ़िर
लाल उठो!!
लाल उठो!!
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
जीवन है पीड़ा, क्यों द्रवित हो
जीवन है पीड़ा, क्यों द्रवित हो
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
" उज़्र " ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
3079.*पूर्णिका*
3079.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
एक और इंकलाब
एक और इंकलाब
Shekhar Chandra Mitra
We host the flag of HINDI FESTIVAL but send our kids to an E
We host the flag of HINDI FESTIVAL but send our kids to an E
DrLakshman Jha Parimal
साहस है तो !
साहस है तो !
Ramswaroop Dinkar
जितना तुझे लिखा गया , पढ़ा गया
जितना तुझे लिखा गया , पढ़ा गया
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
#शेर
#शेर
*Author प्रणय प्रभात*
हम कवियों की पूँजी
हम कवियों की पूँजी
आकाश महेशपुरी
अल्फाज़
अल्फाज़
Shweta Soni
शब्दों का गुल्लक
शब्दों का गुल्लक
Amit Pathak
असर-ए-इश्क़ कुछ यूँ है सनम,
असर-ए-इश्क़ कुछ यूँ है सनम,
Amber Srivastava
*लेटलतीफ: दस दोहे*
*लेटलतीफ: दस दोहे*
Ravi Prakash
कदम छोटे हो या बड़े रुकना नहीं चाहिए क्योंकि मंजिल पाने के ल
कदम छोटे हो या बड़े रुकना नहीं चाहिए क्योंकि मंजिल पाने के ल
Swati
बारम्बार प्रणाम
बारम्बार प्रणाम
Pratibha Pandey
Though of the day 😇
Though of the day 😇
ASHISH KUMAR SINGH
"इस रोड के जैसे ही _
Rajesh vyas
बहुत अंदर तक जला देती हैं वो शिकायतें,
बहुत अंदर तक जला देती हैं वो शिकायतें,
शेखर सिंह
दूर तलक कोई नजर नहीं आया
दूर तलक कोई नजर नहीं आया
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
"महत्वाकांक्षा"
Dr. Kishan tandon kranti
टूटा हूँ इतना कि जुड़ने का मन नही करता,
टूटा हूँ इतना कि जुड़ने का मन नही करता,
Vishal babu (vishu)
दो किसान मित्र थे साथ रहते थे साथ खाते थे साथ पीते थे सुख दु
दो किसान मित्र थे साथ रहते थे साथ खाते थे साथ पीते थे सुख दु
कृष्णकांत गुर्जर
अगहन कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के
अगहन कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के
Shashi kala vyas
बिहार, दलित साहित्य और साहित्य के कुछ खट्टे-मीठे प्रसंग / MUSAFIR BAITHA
बिहार, दलित साहित्य और साहित्य के कुछ खट्टे-मीठे प्रसंग / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
चराग़ों की सभी ताक़त अँधेरा जानता है
चराग़ों की सभी ताक़त अँधेरा जानता है
अंसार एटवी
मैं एक महल हूं।
मैं एक महल हूं।
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
मेरी किस्मत
मेरी किस्मत
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
Loading...