Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

…..उनके लिए मैं कितना लिखूं?

बोलो,अब क्या लिखूं, उनके लिए मैं कितना लिखूं?
क्या एक दिन आपके नाम लिखूं, बाकी दिन गुमनाम लिखूं।
पिता जी! रहेंगे अपरिभाषित आप, चाहे मैं जितना लिखूं।।

हो जाए पूरी वह मन्नत लिखूं,आपके पैरों में जन्नत लिखूं।
कड़ी धूप की छांव लिखूं या वात्सल्य से भरा गांव लिखूं।
पिता जी! रहेंगे अपरिभाषित आप, चाहे मैं जितना लिखूं।।

आपको पालनहार लिखूं या विशाल हृदय का सार लिखूं।
मैं जो हूं वह आज लिखूं या अपने सर का सरताज लिखूं।
पिता जी! रहेंगे अपरिभाषित आप, चाहे मैं जितना लिखूं।।

आप ही पहचान मेरी, आप पर अपनी उम्र तमाम लिखूं।
जो शब्दों में ना हो बयां उनके लिए अब क्या आम लिखूं।
पिता जी! रहेंगे अपरिभाषित आप, चाहे मैं जितना लिखूं।।

खुशियों का सार आप हो क्यों ना आपको भगवान लिखूं।
‘तूलिका’ पड़ जाती है बौनी, जब एक शब्द में सारा जहान लिखूं।
पिता जी! रहेंगे अपरिभाषित आप, चाहे मैं जितना लिखूं।।

~ऋचा त्रिपाठी “तूलिका”
~प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

18 Likes · 15 Comments · 152 Views
You may also like:
रामपुर में काका हाथरसी नाइट
Ravi Prakash
👌राम स्त्रोत👌
DR ARUN KUMAR SHASTRI
कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग ७]
Anamika Singh
ऊँच-नीच के कपाट ।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
ग़ज़ल -
Mahendra Narayan
कातिल ना मिला।
Taj Mohammad
💐आत्म साक्षात्कार💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सुनो ! हे राम ! मैं तुम्हारा परित्याग करती हूँ...
ओनिका सेतिया 'अनु '
बॉलीवुड का अंधा गोरी प्रेम और भारतीय समाज पर इसके...
हरिनारायण तनहा
बेबसी
Varsha Chaurasiya
प्यार का अलख
DESH RAJ
पत्ते ने अगर अपना रंग न बदला होता
Dr. Alpa H. Amin
मैं अश्क हूं।
Taj Mohammad
आजादी का जश्न
DESH RAJ
सिया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
गर्मी का कहर
Ram Krishan Rastogi
लिट्टी छोला
आकाश महेशपुरी
वो बरगद का पेड़
Shiwanshu Upadhyay
दो दिलों का मेल है ये
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
My eyes look for you.
Taj Mohammad
चल-चल रे मन
Anamika Singh
दर्द के रिश्ते
Vikas Sharma'Shivaaya'
खस्सीक दाम दस लाख
Ranjit Jha
सुर बिना संगीत सूना.!
Prabhudayal Raniwal
पिता कुछ भी कर जाता है।
Taj Mohammad
वो खुश हैं अपने हाल में...!!
Ravi Malviya
कारण के आगे कारण
सूर्यकांत द्विवेदी
जीना अब बे मतलब सा लग रहा है।
Taj Mohammad
वाक्य से पोथी पढ़
शेख़ जाफ़र खान
'पिता' हैं 'परमेश्वरा........
Dr. Alpa H. Amin
Loading...