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इस देश को प्राचीन संस्कार चाहिये

इस देश को प्राचीन संस्कार चाहिये
कर्तव्य हो प्रमुख,नही अधिकार चाहिये।
शिक्षा मिले कुछ ऐसी, जिसमें मूल्य भी रहें
हमको नहीं अब खोखला व्यापार चाहिये।
फैशन भी तन पे हो, लेकिन शभ्यता में हो
हर चाल ढाल में, अब सदाचार चाहिये।
अपराध जो करे, सजा तत्काल ही मिले
तारीख़ पे तारीख़ की, मिशाल न मिले
भारत के इस कानून में सुधार चाहिये।
छूने को छू सकता है, हर बुलंदियां कोई
माता पिता गुरु जी, का बस प्यार चाहिये।
ग़रीबी भुखमरी और लाचारियां भी हैं
कश्मीर असम अरुणांचल की दुश्वारियां भी हैं
पड़ोशियों की हरकतों को कर दे पल में
जो दफन,
दिल्ली की कुर्सी पे अब चमत्कार चाहिये
इस देश को प्राचीन संस्कार चाहिये।।

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