Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-129💐

इश्क़ में डरना मत बिल्कुल मत डरना,
सभी को मरना है यहाँ सभी को मरना।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
286 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बचपन याद बहुत आता है
बचपन याद बहुत आता है
VINOD CHAUHAN
छोटी छोटी खुशियों से भी जीवन में सुख का अक्षय संचार होता है।
छोटी छोटी खुशियों से भी जीवन में सुख का अक्षय संचार होता है।
Dr MusafiR BaithA
शेखर सिंह
शेखर सिंह
शेखर सिंह
रहना चाहें स्वस्थ तो , खाएँ प्रतिदिन सेब(कुंडलिया)
रहना चाहें स्वस्थ तो , खाएँ प्रतिदिन सेब(कुंडलिया)
Ravi Prakash
किसी से बाते करना छोड़ देना यानि की त्याग देना, उसे ब्लॉक कर
किसी से बाते करना छोड़ देना यानि की त्याग देना, उसे ब्लॉक कर
Rj Anand Prajapati
बाल कविता: वर्षा ऋतु
बाल कविता: वर्षा ऋतु
Rajesh Kumar Arjun
हर एक चेहरा निहारता
हर एक चेहरा निहारता
goutam shaw
दोहा
दोहा
दुष्यन्त 'बाबा'
" छोटा सिक्का"
Dr Meenu Poonia
फूल और कांटे
फूल और कांटे
अखिलेश 'अखिल'
💐प्रेम कौतुक-483💐
💐प्रेम कौतुक-483💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
कहानी-
कहानी- "हाजरा का बुर्क़ा ढीला है"
Dr Tabassum Jahan
Sometimes…
Sometimes…
पूर्वार्थ
शिकवा गिला शिकायतें
शिकवा गिला शिकायतें
Dr fauzia Naseem shad
"फूल बिखेरता हुआ"
Dr. Kishan tandon kranti
इमोशनल पोस्ट
इमोशनल पोस्ट
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*अज्ञानी की कलम  *शूल_पर_गीत*
*अज्ञानी की कलम *शूल_पर_गीत*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
सफर में हमसफ़र
सफर में हमसफ़र
Atul "Krishn"
मंदिर बनगो रे
मंदिर बनगो रे
Sandeep Pande
हमें दुख देकर खुश हुए थे आप
हमें दुख देकर खुश हुए थे आप
ruby kumari
■ समझ का अकाल
■ समझ का अकाल
*Author प्रणय प्रभात*
फितरत की बातें
फितरत की बातें
Mahendra Narayan
मेरी कलम से...
मेरी कलम से...
Anand Kumar
प्रकाशित हो मिल गया, स्वाधीनता के घाम से
प्रकाशित हो मिल गया, स्वाधीनता के घाम से
Pt. Brajesh Kumar Nayak
उदारता
उदारता
RAKESH RAKESH
नव अंकुर स्फुटित हुआ है
नव अंकुर स्फुटित हुआ है
Shweta Soni
3249.*पूर्णिका*
3249.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Tu itna majbur kyu h , gairo me mashur kyu h
Tu itna majbur kyu h , gairo me mashur kyu h
Sakshi Tripathi
सुबह सुहानी आपकी, बने शाम रंगीन।
सुबह सुहानी आपकी, बने शाम रंगीन।
आर.एस. 'प्रीतम'
विचार, संस्कार और रस-4
विचार, संस्कार और रस-4
कवि रमेशराज
Loading...