Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Jan 2023 · 1 min read

इश्क़ का पिंजरा ( ग़ज़ल )

इश्क़ का पिंजरा “-

हर पल…. उन्हें बस याद करते हैं ।
हम वक़्त….. कहाँ बर्बाद करते हैं ।।

बस…… उनके तसव्वुर से अपना ।
आशियाना…….. आबाद करते हैं ।।

चुपचाप….. सह लेते हैं सारे सितम ।
ख़िलाफ़ उनके कहां जेहाद करते हैं ।।

ख़ुद रहते हैं……. इश्क़ के पिंजरे में ।
बस परिंदों को हम आज़ाद करते हैं ।।

“काज़ी”……… चाहत की जादूगरी से ।
रंज के लम्हों को भी….. शाद करते हैं ।।

©डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
©काज़ीकीक़लम

28/3/2 , अहिल्या पल्टन , इकबाल कालोनी
इंदौर , जिला-इंदौर , मध्यप्रदेश

264 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
उसे पता है मुझे तैरना नहीं आता,
उसे पता है मुझे तैरना नहीं आता,
Vishal babu (vishu)
तुझमें : मैं
तुझमें : मैं
Dr.Pratibha Prakash
प्रतीक्षा
प्रतीक्षा
Shaily
मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
Dr Archana Gupta
रेत पर
रेत पर
Shweta Soni
इल्ज़ाम ना दे रहे हैं।
इल्ज़ाम ना दे रहे हैं।
Taj Mohammad
माँ
माँ
Raju Gajbhiye
मुकद्दर
मुकद्दर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
घमंड की बीमारी बिलकुल शराब जैसी हैं
घमंड की बीमारी बिलकुल शराब जैसी हैं
शेखर सिंह
नवरात्रि के सातवें दिन दुर्गाजी की सातवीं शक्ति देवी कालरात्
नवरात्रि के सातवें दिन दुर्गाजी की सातवीं शक्ति देवी कालरात्
Shashi kala vyas
बाट का बटोही कर्मपथ का राही🦶🛤️🏜️
बाट का बटोही कर्मपथ का राही🦶🛤️🏜️
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
तुम मुझे भुला ना पाओगे
तुम मुझे भुला ना पाओगे
Ram Krishan Rastogi
*पुष्प-मित्र रमेश कुमार जैन की कविताऍं*
*पुष्प-मित्र रमेश कुमार जैन की कविताऍं*
Ravi Prakash
Mental health
Mental health
Bidyadhar Mantry
छिपी हो जिसमें सजग संवेदना।
छिपी हो जिसमें सजग संवेदना।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
क्या छिपा रहे हो
क्या छिपा रहे हो
Ritu Asooja
जिस प्रकार सूर्य पृथ्वी से इतना दूर होने के बावजूद भी उसे अप
जिस प्रकार सूर्य पृथ्वी से इतना दूर होने के बावजूद भी उसे अप
Sukoon
मतदान करो और देश गढ़ों!
मतदान करो और देश गढ़ों!
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
राम
राम
Sanjay ' शून्य'
3241.*पूर्णिका*
3241.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आत्मनिर्भरता
आत्मनिर्भरता
Dr. Pradeep Kumar Sharma
भरे मन भाव अति पावन....
भरे मन भाव अति पावन....
डॉ.सीमा अग्रवाल
विश्वास
विश्वास
Paras Nath Jha
थोड़ा थोड़ा
थोड़ा थोड़ा
Satish Srijan
दरदू
दरदू
Neeraj Agarwal
9) “जीवन एक सफ़र”
9) “जीवन एक सफ़र”
Sapna Arora
आत्मीयकरण-1 +रमेशराज
आत्मीयकरण-1 +रमेशराज
कवि रमेशराज
मैं रूठ जाता हूँ खुद से, उससे, सबसे
मैं रूठ जाता हूँ खुद से, उससे, सबसे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
जब कोई हाथ और साथ दोनों छोड़ देता है
जब कोई हाथ और साथ दोनों छोड़ देता है
Ranjeet kumar patre
#हिंदी_मुक्तक-
#हिंदी_मुक्तक-
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...