Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Jul 2023 · 1 min read

इंसानियत का कत्ल

इंसान को हैवान बनते देखा है
अब तुम्हें क्या कहूं मैं
वहशी दरिंदों! देखकर क्रूरता तुम्हारी
शर्मसार हो गया हूं मैं

शर्मसार है माँ भारती
जिसकी धरापर ये कुकृत्य हुआ
सरेआम नग्नकर बेटियों को
उनके जिस्म से जो खिलवाड़ हुआ

नहीं हुआ अपराध सिर्फ़ नारी के साथ
हत्या कर गए थे उस दिन इंसानियत की भी कोई
जो भी कर रहा था दरिंदगी वहां
न इंसान था, न जानवर, था वो वहशी कोई

है शरम गिद्धों में तुमसे ज़्यादा
नहीं नोचते कभी वो भी ज़िंदा जिस्म
खेलता है नारी की असमत से जो
एक दिन हो ही जाता है वो भी भस्म

शरमा जाएंगे जानवर भी
देखकर ऐसा क्रूर व्यवहार
मिले सज़ा ऐसी वहशियों को
हिल जाए दरिंदों के तार

क्रूरता की है जिसने
क्रूरता उसपर भी दिखाई जाए
इंसानियत के हत्यारों पर
कोई नरमी न दिखाई जाए

है अर्ज़ यही हुकमरानों से
वहशियों को ऐसी सज़ा दिलाई जाए
काँप जाए रूह भी उसकी
जो किसी के मन में भी फिर ऐसा विचार आए।

9 Likes · 1 Comment · 1790 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
View all
You may also like:
मेरी शक्ति
मेरी शक्ति
Dr.Priya Soni Khare
दोस्ती
दोस्ती
Neeraj Agarwal
वृक्ष किसी को
वृक्ष किसी को
DrLakshman Jha Parimal
चिंतन और अनुप्रिया
चिंतन और अनुप्रिया
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
साए
साए
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
2. *मेरी-इच्छा*
2. *मेरी-इच्छा*
Dr Shweta sood
विचार, संस्कार और रस [ एक ]
विचार, संस्कार और रस [ एक ]
कवि रमेशराज
परिभाषाएं अनगिनत,
परिभाषाएं अनगिनत,
महेश चन्द्र त्रिपाठी
तेज़ाब का असर
तेज़ाब का असर
Atul "Krishn"
कविता: मेरी अभिलाषा- उपवन बनना चाहता हूं।
कविता: मेरी अभिलाषा- उपवन बनना चाहता हूं।
Rajesh Kumar Arjun
"आज की कविता"
Dr. Kishan tandon kranti
शराफत नहीं अच्छी
शराफत नहीं अच्छी
VINOD CHAUHAN
■ आज की बात
■ आज की बात
*प्रणय प्रभात*
आज आप जिस किसी से पूछो कि आप कैसे हो? और क्या चल रहा है ज़िं
आज आप जिस किसी से पूछो कि आप कैसे हो? और क्या चल रहा है ज़िं
पूर्वार्थ
सबका वह शिकार है, सब उसके ही शिकार हैं…
सबका वह शिकार है, सब उसके ही शिकार हैं…
Anand Kumar
*धक्का-मुक्की मच रही, झूले पर हर बार (कुंडलिया)*
*धक्का-मुक्की मच रही, झूले पर हर बार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
तूं मुझे एक वक्त बता दें....
तूं मुझे एक वक्त बता दें....
Keshav kishor Kumar
हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी
हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी
Mukesh Kumar Sonkar
जंगल में सर्दी
जंगल में सर्दी
Kanchan Khanna
बुद्ध पूर्णिमा विशेष:
बुद्ध पूर्णिमा विशेष:
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
जय जय भोलेनाथ की, जय जय शम्भूनाथ की
जय जय भोलेनाथ की, जय जय शम्भूनाथ की
gurudeenverma198
जो सोचूँ मेरा अल्लाह वो ही पूरा कर देता है.......
जो सोचूँ मेरा अल्लाह वो ही पूरा कर देता है.......
shabina. Naaz
नारी है तू
नारी है तू
Dr. Meenakshi Sharma
उपदेशों ही मूर्खाणां प्रकोपेच न च शांतय्
उपदेशों ही मूर्खाणां प्रकोपेच न च शांतय्
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
हमारा मन
हमारा मन
surenderpal vaidya
*पुस्तक*
*पुस्तक*
Dr. Priya Gupta
मेरे जब से सवाल कम हैं
मेरे जब से सवाल कम हैं
Dr. Mohit Gupta
2669.*पूर्णिका*
2669.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
अज़ल से इंतजार किसका है
अज़ल से इंतजार किसका है
Shweta Soni
हार भी स्वीकार हो
हार भी स्वीकार हो
Dr fauzia Naseem shad
Loading...