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7 Jul 2016 · 1 min read

इंतज़ार

आज भी इंतज़ार में वो आंगण तुम्हारा है,
बचपन को तुम्हारे याद अब भी वो करता है,
तुम व्यस्त हो खबर यह गांव की मिट्टी को भी है,
जिसकी सौंधी खुशबू में तुमने गिर गिरकर चलना सीखा था,
उन बूढ़ी आँखों का हो गया इंतज़ार अब के और भी लम्बा,
इन छुट्टियों में न बहाना अब कोई नया करना,
हैं आँखें सूर्ख पर होंठों पर चुप्पी सी है,
शिकायते मन के किसी कोने में शायद बस दफन हैं।।।
कामनी गुप्ता ***

Language: Hindi
Tag: कविता
164 Views
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