Oct 18, 2016 · 1 min read

आस का ,अभिलाष का ,विश्वास का हो:: जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट४९) मुक्तक

मुक्तक ::

आस का , अभिलाष का , विश्वास का हो ।
पल्लवित वट — वृक्ष अब मधुमास का हो ।
बैठ जिसकी छॉव में जीवन सँवारें ।
हम सभी को प्रत्येक पल उल्लास का हो ।।४९,!!

— जितेंद्रकमल आनंद

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