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10 Feb 2024 · 1 min read

आफ़ताब

हर शाम आफ़ताब
जब जमीं को है चूमता
वो फ़लक़ से शर्म से सुर्ख़ होता है
तब शफक़

कुछ देर की ही बात है
ओढ़ कर सुनहरा सा दुपट्टा
दरिया की आगोश में
ख़्वाबों की दुनियाँ में
सोता आफ़ताब है रात भर

Language: Hindi
54 Views
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