Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 May 2022 · 2 min read

आदर्श पिता

पिता का अर्थ हीं होता है पता होना, अर्थात अपने पुत्र की हर गतिविधि भावना व विचार का पता होना ।
एक आदर्श पिता अपने पुत्र के हित के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है।
पिता के महत्व और पुत्र कल्याण का परिदृश्य हमें रामायण काल में सर्वोत्कृष्ट दिखता है।
राजा दशरथ में आदर्श पिता को देख सकते हैं।
जिन्होंने पुत्र हित में अपना प्राण त्याग दिया।
राजा दशरथ को राम की मनोभावना व विचार के बारे में स्पष्ट पता था कि राम किस मन:पीड़ा से पीड़ित हैं।
वे जानते थे कि मेरे वचन न पूर्ण करने पर राम अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाएगा। अंतः पीड़ा से राम हमेशा व्यथित रहेंगे ,और ये पुत्र हित के लिए अच्छा नहीं है।
राजा दशरथ ये जानते हुए की राम के वन जाते ही हमारे प्राण निकल जायेंगे।
पर पुत्र जिस अवस्था में खुश रहना चाहता है वे उसके मार्ग में अवरोधक नही बनेंगे।
इस प्रकार राम के वन जाते हीं राजा दशरथ के प्राण निकल जाता है।
ये प्राण राम के मोह में नही निकलता बल्कि पुत्र हित निमित निकलता है।
क्योंकि पिता को पता था की राम को(पुत्र को)वन भेज के हम राजसुख नही पा सकते । यू हीं व्यथित रहूंगा
और मेरे व्यथित रहने से राम वन में भी व्यथित रहेगा
इस प्रकार मेरी पीड़ा से वो पीड़ित रहेगा
और जिस पीड़ा को दूर करने के लिए उसने सर्वस्व
त्याग किया उसी को पुनःपीड़ा देना पिता धर्म के विरुद्ध होगा। और पुत्र के लोककल्याण में बाधक होगा।राजा दशरथ एक पिता अपना प्राण त्याग कर अपने पुत्र की व्यथा को कम करने के साथ साथ अपने पुत्र को वन भेजने के लांछन से मुक्त हुए।

साहिल
कुदरा,सासाराम ।

16 Likes · 11 Comments · 787 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from साहिल
View all
You may also like:
किस किस से बचाऊं तुम्हें मैं,
किस किस से बचाऊं तुम्हें मैं,
Vishal babu (vishu)
कतिपय दोहे...
कतिपय दोहे...
डॉ.सीमा अग्रवाल
सुनो पहाड़ की....!!! (भाग - १)
सुनो पहाड़ की....!!! (भाग - १)
Kanchan Khanna
मकड़ी ने जाला बुना, उसमें फँसे शिकार
मकड़ी ने जाला बुना, उसमें फँसे शिकार
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बढ़ता उम्र घटता आयु
बढ़ता उम्र घटता आयु
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
मन और मस्तिष्क
मन और मस्तिष्क
Dhriti Mishra
*नासमझ*
*नासमझ*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
प्रिय विरह
प्रिय विरह
लक्ष्मी सिंह
विपरीत परिस्थितियों में
विपरीत परिस्थितियों में
Dr fauzia Naseem shad
पति पत्नी पर हास्य व्यंग
पति पत्नी पर हास्य व्यंग
Ram Krishan Rastogi
मुक्तक
मुक्तक
sushil sarna
नई शुरुआत
नई शुरुआत
Neeraj Agarwal
हे प्रभु मेरी विनती सुन लो , प्रभु दर्शन की आस जगा दो
हे प्रभु मेरी विनती सुन लो , प्रभु दर्शन की आस जगा दो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
"मकर संक्रान्ति"
Dr. Kishan tandon kranti
हाइकु : रोहित वेमुला की ’बलिदान’ आत्महत्या पर / मुसाफ़िर बैठा
हाइकु : रोहित वेमुला की ’बलिदान’ आत्महत्या पर / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
Mujhe laga tha irade majbut hai mere ,
Mujhe laga tha irade majbut hai mere ,
Sakshi Tripathi
#प्रयोगात्मक_कविता-
#प्रयोगात्मक_कविता-
*Author प्रणय प्रभात*
नारी निन्दा की पात्र नहीं, वह तो नर की निर्मात्री है
नारी निन्दा की पात्र नहीं, वह तो नर की निर्मात्री है
महेश चन्द्र त्रिपाठी
"लक्की"
Dr Meenu Poonia
अगर फैसला मैं यह कर लूं
अगर फैसला मैं यह कर लूं
gurudeenverma198
2702.*पूर्णिका*
2702.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
"Don't be fooled by fancy appearances, for true substance li
Manisha Manjari
रमेशराज की पत्नी विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की पत्नी विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
बहाव के विरुद्ध कश्ती वही चला पाते जिनका हौसला अंबर की तरह ब
बहाव के विरुद्ध कश्ती वही चला पाते जिनका हौसला अंबर की तरह ब
Dr.Priya Soni Khare
मैं ढूंढता हूं रातो - दिन कोई बशर मिले।
मैं ढूंढता हूं रातो - दिन कोई बशर मिले।
सत्य कुमार प्रेमी
तुझसा कोई प्यारा नहीं
तुझसा कोई प्यारा नहीं
Mamta Rani
*धन्य तुलसीदास हैं (मुक्तक)*
*धन्य तुलसीदास हैं (मुक्तक)*
Ravi Prakash
उगते हुए सूरज और ढलते हुए सूरज मैं अंतर सिर्फ समय का होता है
उगते हुए सूरज और ढलते हुए सूरज मैं अंतर सिर्फ समय का होता है
Annu Gurjar
जिन्दगी मे एक बेहतरीन व्यक्ति होने के लिए आप मे धैर्य की आवश
जिन्दगी मे एक बेहतरीन व्यक्ति होने के लिए आप मे धैर्य की आवश
पूर्वार्थ
किसको-किसको क़ैद करोगे?
किसको-किसको क़ैद करोगे?
Shekhar Chandra Mitra
Loading...