Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Nov 2023 · 1 min read

आगाह

वहशी दरिन्दों पर हमदर्दी जताना
छोड़ दो ,
सियासत को दहश़़तग़र्दी से मिलाना
छोड़ दो ,

जो अपनो के ना हुए वो तुम्हारे
किस- क़दर बनेंगे ,
ये ख़ुदगर्ज़ वक्त आने पर तुम्हें भी
मिटा कर रहेंगे ,

नापाक़ इरादों की इंतिहा,
बर्बादी की ओर ले जाती है ,
ज़िंदगी शर्मसार होती है,
इंसानियत सिसकती रह जाती है,

वक्त रहते सियासी ख़ुदगर्ज़ी की
तीरगी से बाहर आओ,
इंसानियत को पहचानो ,
अपने फर्ज़ और ज़र्फ़ को जानो,

वरना अपने ही बुने जाल में
उलझकर रह जाओगे ,
लाख कोशिश करने पर भी
उबर ना पाओगे।

Language: Hindi
77 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Shyam Sundar Subramanian
View all
You may also like:
जुगनू
जुगनू
Dr. Pradeep Kumar Sharma
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बाल कविता: लाल भारती माँ के हैं हम
बाल कविता: लाल भारती माँ के हैं हम
नाथ सोनांचली
नारा पंजाबियत का, बादल का अंदाज़
नारा पंजाबियत का, बादल का अंदाज़
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
14. आवारा
14. आवारा
Rajeev Dutta
मंजर जो भी देखा था कभी सपनों में हमने
मंजर जो भी देखा था कभी सपनों में हमने
कवि दीपक बवेजा
सही नहीं है /
सही नहीं है /
ईश्वर दयाल गोस्वामी
काशी में नहीं है वो,
काशी में नहीं है वो,
Satish Srijan
*अज्ञानी की कलम  *शूल_पर_गीत*
*अज्ञानी की कलम *शूल_पर_गीत*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
ठंडक
ठंडक
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
कस्तूरी इत्र
कस्तूरी इत्र
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
इतने बीमार
इतने बीमार
Dr fauzia Naseem shad
मेरे दिल के खूं से, तुमने मांग सजाई है
मेरे दिल के खूं से, तुमने मांग सजाई है
gurudeenverma198
अनपढ़ दिखे समाज, बोलिए क्या स्वतंत्र हम
अनपढ़ दिखे समाज, बोलिए क्या स्वतंत्र हम
Pt. Brajesh Kumar Nayak
विनती सुन लो हे ! राधे
विनती सुन लो हे ! राधे
Pooja Singh
कविता की महत्ता।
कविता की महत्ता।
Rj Anand Prajapati
मौसम मौसम बदल गया
मौसम मौसम बदल गया
The_dk_poetry
पूर्व दिशा से सूरज रोज निकलते हो
पूर्व दिशा से सूरज रोज निकलते हो
Dr Archana Gupta
धन्यवाद कोरोना
धन्यवाद कोरोना
Arti Bhadauria
■ मौलिकता का अपना मूल्य है। आयातित में क्या रखा है?
■ मौलिकता का अपना मूल्य है। आयातित में क्या रखा है?
*Author प्रणय प्रभात*
नये पुराने लोगों के समिश्रण से ही एक नयी दुनियाँ की सृष्टि ह
नये पुराने लोगों के समिश्रण से ही एक नयी दुनियाँ की सृष्टि ह
DrLakshman Jha Parimal
सुहाग रात
सुहाग रात
Ram Krishan Rastogi
बुरा ख्वाबों में भी जिसके लिए सोचा नहीं हमने
बुरा ख्वाबों में भी जिसके लिए सोचा नहीं हमने
Shweta Soni
Yash Mehra
Yash Mehra
Yash mehra
निलय निकास का नियम अडिग है
निलय निकास का नियम अडिग है
Atul "Krishn"
चिंता
चिंता
RAKESH RAKESH
कागज़ की नाव सी, न हो जिन्दगी तेरी
कागज़ की नाव सी, न हो जिन्दगी तेरी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
"चुलबुला रोमित"
Dr Meenu Poonia
सुनो सुनाऊॅ॑ अनसुनी कहानी
सुनो सुनाऊॅ॑ अनसुनी कहानी
VINOD CHAUHAN
*चलते रहे जो थाम, मर्यादा-ध्वजा अविराम हैं (मुक्तक)*
*चलते रहे जो थाम, मर्यादा-ध्वजा अविराम हैं (मुक्तक)*
Ravi Prakash
Loading...