Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Aug 2023 · 1 min read

आओ थोड़ा जी लेते हैं

आओ, थोड़ा जी लेते हैं
“”””””””””””””
आओ, थोड़ा जी लेते हैं
अब कल का क्या भरोसा ?
इसलिए आज ही अपने
अटके सारे काम निपटाते हैं।
बहुत कर ली हमने तू-तू मैं-मैं
अब साथ जी करके देखते हैं।
आओ, आज सब मिलकर
हम मन के मैल मिटाते हैं।
बहुत भटक चुके हैं हम
अब और नहीं भटकेंगे।
बहुत जी लिए हम अपने लिए
अब औरों के लिए भी जीएंगे।
बहुत कर लिए जोड़-तोड़
अब इससे हम बचते हैं।
जो कुछ भी पास हमारे है
उसे ही अब पूरा मानते हैं।
करने को तो काम बहुत हैं
यहाँ समय का भी अभाव है।
आओ, हम कुछ अच्छा करते हैं
अपने पीछे छाप छोड़ जाते हैं।
आओ, थोड़ा जी लेते हैं।
– डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़

106 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जिंदगी में संतुलन खुद की कमियों को समझने से बना रहता है,
जिंदगी में संतुलन खुद की कमियों को समझने से बना रहता है,
Seema gupta,Alwar
........,!
........,!
शेखर सिंह
डाइन
डाइन
अवध किशोर 'अवधू'
तेरी आमद में पूरी जिंदगी तवाफ करु ।
तेरी आमद में पूरी जिंदगी तवाफ करु ।
Phool gufran
*बरसे एक न बूँद, मेघ क्यों आए काले ?*(कुंडलिया)
*बरसे एक न बूँद, मेघ क्यों आए काले ?*(कुंडलिया)
Ravi Prakash
कागज़ ए जिंदगी
कागज़ ए जिंदगी
Neeraj Agarwal
तेरे प्यार के राहों के पथ में
तेरे प्यार के राहों के पथ में
singh kunwar sarvendra vikram
3479🌷 *पूर्णिका* 🌷
3479🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
*साँसों ने तड़फना कब छोड़ा*
*साँसों ने तड़फना कब छोड़ा*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
गीता हो या मानस
गीता हो या मानस
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
गिरगिट
गिरगिट
Dr. Pradeep Kumar Sharma
लोग चाहते हैं कि आप बेहतर करें
लोग चाहते हैं कि आप बेहतर करें
Virendra kumar
चौथ मुबारक हो तुम्हें शुभ करवा के साथ।
चौथ मुबारक हो तुम्हें शुभ करवा के साथ।
सत्य कुमार प्रेमी
ਰਿਸ਼ਤਿਆਂ ਦੀਆਂ ਤਿਜਾਰਤਾਂ
ਰਿਸ਼ਤਿਆਂ ਦੀਆਂ ਤਿਜਾਰਤਾਂ
Surinder blackpen
ग़म ज़दा लोगों से जाके मिलते हैं
ग़म ज़दा लोगों से जाके मिलते हैं
अंसार एटवी
दीपावली की असीम शुभकामनाओं सहित अर्ज किया है ------
दीपावली की असीम शुभकामनाओं सहित अर्ज किया है ------
सिद्धार्थ गोरखपुरी
"ऐसा क्यों होता है?"
Dr. Kishan tandon kranti
"Awakening by the Seashore"
Manisha Manjari
दुनिया के हर क्षेत्र में व्यक्ति जब समभाव एवं सहनशीलता से सा
दुनिया के हर क्षेत्र में व्यक्ति जब समभाव एवं सहनशीलता से सा
Raju Gajbhiye
😢 #लघुकथा / #फ़रमान
😢 #लघुकथा / #फ़रमान
*प्रणय प्रभात*
कांग्रेस के नेताओं ने ही किया ‘तिलक’ का विरोध
कांग्रेस के नेताओं ने ही किया ‘तिलक’ का विरोध
कवि रमेशराज
रद्दी के भाव बिक गयी मोहब्बत मेरी
रद्दी के भाव बिक गयी मोहब्बत मेरी
Abhishek prabal
ओम साईं रक्षक शरणम देवा
ओम साईं रक्षक शरणम देवा
Sidhartha Mishra
धरा और हरियाली
धरा और हरियाली
Buddha Prakash
बाल दिवस विशेष- बाल कविता - डी के निवातिया
बाल दिवस विशेष- बाल कविता - डी के निवातिया
डी. के. निवातिया
* लोकतंत्र महान है *
* लोकतंत्र महान है *
surenderpal vaidya
शिशिर ऋतु-३
शिशिर ऋतु-३
Vishnu Prasad 'panchotiya'
*
*"सदभावना टूटे हृदय को जोड़ती है"*
Shashi kala vyas
शून्य
शून्य
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
स्वयं को स्वयं पर
स्वयं को स्वयं पर
Dr fauzia Naseem shad
Loading...