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14 Jul 2016 · 1 min read

*अम्बर पर छाने की धुन*

अम्बर पर छाने की धुन में बदले परिभाषा
पूरी होती उसके मन की हर इक अभिलाषा
परम्परा के धागों में जो फ़ंसता ना कभी
जग को राह वही दिखलाता करता दूर निराशा
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
340 Views
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