Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jul 2023 · 1 min read

अब नहीं पाना तुम्हें

शेष न साहस तुम्हें अब खोने का
इसलिए ही अब नही पाना तुम्हें ।
दरमियां अब और दूरी आ न जाएं
इसलिए अब पास न आना हमे ।
है सुना कि जगत में सब कुछ क्षणिक
पाना खोना मन का केवल भ्रम ही है
किन्तु इस भ्रम में भ्रमरते ही सदा से
जाने कितनी बार जीकर मर चुकी मैं।
स्वप्न के सुन्दर महल मन ने रचे जो
जाने कितनी बार ढहते लख चुकी मैं ।
आघात सहते मन शिथिल ये हो चुका
मांगता है अब विदा देह द्वार से ।
किन्तु ये तन हो अकिंचन रिक्त भी
खोजता खुद को भटकता फिर रहा है। .

Language: Hindi
146 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Saraswati Bajpai
View all
You may also like:
कहां  गए  वे   खद्दर  धारी  आंसू   सदा   बहाने  वाले।
कहां गए वे खद्दर धारी आंसू सदा बहाने वाले।
कुंवर तुफान सिंह निकुम्भ
I sit at dark to bright up in the sky 😍 by sakshi
I sit at dark to bright up in the sky 😍 by sakshi
Sakshi Tripathi
बैठ गए
बैठ गए
विजय कुमार नामदेव
// अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद //
// अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद //
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
उमंग
उमंग
Akash Yadav
प्यार विश्वाश है इसमें कोई वादा नहीं होता!
प्यार विश्वाश है इसमें कोई वादा नहीं होता!
Diwakar Mahto
जीवन जीते रहने के लिए है,
जीवन जीते रहने के लिए है,
Prof Neelam Sangwan
#drarunkumarshastriblogger
#drarunkumarshastriblogger
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मुड़े पन्नों वाली किताब
मुड़े पन्नों वाली किताब
Surinder blackpen
टेसू के वो फूल कविताएं बन गये ....
टेसू के वो फूल कविताएं बन गये ....
Kshma Urmila
# होड़
# होड़
Dheerja Sharma
#जय_राष्ट्र
#जय_राष्ट्र
*Author प्रणय प्रभात*
दिखा तू अपना जलवा
दिखा तू अपना जलवा
gurudeenverma198
किसी को फर्क भी नही पड़ता
किसी को फर्क भी नही पड़ता
पूर्वार्थ
Perceive Exams as a festival
Perceive Exams as a festival
Tushar Jagawat
*यहाँ पर आजकल होती हैं ,बस बाजार की बातें ( हिंदी गजल/गीतिक
*यहाँ पर आजकल होती हैं ,बस बाजार की बातें ( हिंदी गजल/गीतिक
Ravi Prakash
परोपकार
परोपकार
ओंकार मिश्र
मेरा तितलियों से डरना
मेरा तितलियों से डरना
ruby kumari
*निंदिया कुछ ऐसी तू घुट्टी पिला जा*-लोरी
*निंदिया कुछ ऐसी तू घुट्टी पिला जा*-लोरी
Poonam Matia
पैगाम
पैगाम
Shashi kala vyas
जो मेरी जान लेने का इरादा ओढ़ के आएगा
जो मेरी जान लेने का इरादा ओढ़ के आएगा
Harinarayan Tanha
एक गजल
एक गजल
umesh mehra
2830. *पूर्णिका*
2830. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
रूठी बीवी को मनाने चले हो
रूठी बीवी को मनाने चले हो
Prem Farrukhabadi
हमारी मूर्खता ही हमे ज्ञान की ओर अग्रसर करती है।
हमारी मूर्खता ही हमे ज्ञान की ओर अग्रसर करती है।
शक्ति राव मणि
" अंधेरी रातें "
Yogendra Chaturwedi
हर मंजिल के आगे है नई मंजिल
हर मंजिल के आगे है नई मंजिल
कवि दीपक बवेजा
जीवन को
जीवन को
Dr fauzia Naseem shad
पर्दाफाश
पर्दाफाश
Shekhar Chandra Mitra
*सौभाग्य*
*सौभाग्य*
Harminder Kaur
Loading...