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12 Jan 2024 · 1 min read

*अपने बाल खींच कर रोती (बाल कविता)*

अपने बाल खींच कर रोती (बाल कविता)
_______________________
अपने बाल खींचकर रोती
दुखी देर तक अक्सर होती

मॉं ने गुड़िया को समझाया
लेकिन उसको समझ न आया

अब भी ऐसा ही करती है
अपनी करनी खुद भरती है
————-
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451

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