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11 Nov 2021 · 1 min read

अपने घर में हूँ मैं बे मकां की तरह मेरी हालत है उर्दू ज़बां की की तरह

अपने घर में हूँ मैं बे मकां की तरह
मेरी हालत है उर्दू ज़बां की की तरह

मेरा क़द इस ज़मीं से तो ऊँचा न था
मुझको देखा गया आसमां की तरह

चाह कर भी तुझे भूल सकता नहीं
दिल में रहता है तू इक जहाँ की तरह

मेरी हस्ती है गर्दे सफ़र देख ले
मैं हूँ ठहरे हुए कारवां की तरह

जब तलक हूँ तिरे शह्र में हूँ तिरा
उड़के चल दूंगा आसी धुंआ की तरह
_______◆_________
सरफ़राज़ अहमद आसी

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