Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Oct 2023 · 1 min read

अन्तर्मन को झांकती ये निगाहें

अन्तर्मन को झांकती ये निगाहें
टटोलतीं है,अक्स मेरा तुझमें कहीं।
तमाम उलझनों में उलझा है तू,
ढूंढने पर भी, मैं कहीं दिखती नहीं।
क्षितिज सी भ्रमित, तुझमें मिल गयी हूं,
मेरा मुझमें क्या बचा ,तू बता सहीं।
यकीं दिल ने तूझ पर,खुद से ज्यादा किया,
पर कभी पाने की तुझे नहीं चाहत रही।
चाहती हूं भूल सब, मिठास रिस्ते में लाऊं,
पर दिल नहीं कर पाता भरोसा वहीं।

1 Like · 151 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*सुविचरण*
*सुविचरण*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गंगा काशी सब हैं घरही में.
गंगा काशी सब हैं घरही में.
Shyamsingh Lodhi (Tejpuriya)
कुछ बेशकीमती छूट गया हैं तुम्हारा, वो तुम्हें लौटाना चाहता हूँ !
कुछ बेशकीमती छूट गया हैं तुम्हारा, वो तुम्हें लौटाना चाहता हूँ !
The_dk_poetry
भारत के वीर जवान
भारत के वीर जवान
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
हवन
हवन
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
अधूरा ज्ञान
अधूरा ज्ञान
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
महसूस किए जाते हैं एहसास जताए नहीं जाते.
महसूस किए जाते हैं एहसास जताए नहीं जाते.
शेखर सिंह
ये जो तेरे बिना भी, तुझसे इश्क़ करने की आदत है।
ये जो तेरे बिना भी, तुझसे इश्क़ करने की आदत है।
Manisha Manjari
एक किताब खोलो
एक किताब खोलो
Dheerja Sharma
नौकरी
नौकरी
Rajendra Kushwaha
मित्रतापूर्ण कीजिए,
मित्रतापूर्ण कीजिए,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
ज़िंदगी जीना
ज़िंदगी जीना
Dr fauzia Naseem shad
किभी भी, किसी भी रूप में, किसी भी वजह से,
किभी भी, किसी भी रूप में, किसी भी वजह से,
शोभा कुमारी
3080.*पूर्णिका*
3080.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जिन सपनों को पाने के लिए किसी के साथ छल करना पड़े वैसे सपने
जिन सपनों को पाने के लिए किसी के साथ छल करना पड़े वैसे सपने
Paras Nath Jha
हवेली का दर्द
हवेली का दर्द
Atul "Krishn"
डर के आगे जीत है
डर के आगे जीत है
Dr. Pradeep Kumar Sharma
हर पल ये जिंदगी भी कोई खास नहीं होती ।
हर पल ये जिंदगी भी कोई खास नहीं होती ।
Phool gufran
*** लहरों के संग....! ***
*** लहरों के संग....! ***
VEDANTA PATEL
उन दरख्तों पे कोई फूल न खिल पाएंगें
उन दरख्तों पे कोई फूल न खिल पाएंगें
Shweta Soni
किसी ने आंखें बंद की,
किसी ने आंखें बंद की,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
कुछ यूं मेरा इस दुनिया में,
कुछ यूं मेरा इस दुनिया में,
Lokesh Singh
हो गई जब खत्म अपनी जिंदगी की दास्तां..
हो गई जब खत्म अपनी जिंदगी की दास्तां..
Vishal babu (vishu)
भटक ना जाना मेरे दोस्त
भटक ना जाना मेरे दोस्त
Mangilal 713
"नायक"
Dr. Kishan tandon kranti
#आलेख-
#आलेख-
*Author प्रणय प्रभात*
सफ़र ए जिंदगी
सफ़र ए जिंदगी
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
रूबरू।
रूबरू।
Taj Mohammad
ऐसा तूफान उत्पन्न हुआ कि लो मैं फँस गई,
ऐसा तूफान उत्पन्न हुआ कि लो मैं फँस गई,
Sukoon
#शर्माजीकेशब्द
#शर्माजीकेशब्द
pravin sharma
Loading...