Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Aug 2023 · 1 min read

*अज्ञानी की कलम*

अज्ञानी की कलम
नैनों नदी सूखत नीर है।
प्रीति दिल गई चीर है।
हृदय ईशअंश कोहूनीर है।
दीवानगी देती पीर है।।
नज़रों में बसी तस्वीर है।
न बुर्जुगों की नज़ीर है।।
देश की दशा गम्भीर है।
गरीबों की तक्द़ीर है।।
बेरोज़गारी पीर पज़ीर है।
सबको मिले समीर है।।

जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झांसी उ•प्र•

162 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
किताबों में तुम्हारे नाम का मैं ढूँढता हूँ माने
किताबों में तुम्हारे नाम का मैं ढूँढता हूँ माने
आनंद प्रवीण
एक अकेला रिश्ता
एक अकेला रिश्ता
विजय कुमार अग्रवाल
3376⚘ *पूर्णिका* ⚘
3376⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
अर्थ का अनर्थ
अर्थ का अनर्थ
Dr. Pradeep Kumar Sharma
अपने जमीर का कभी हम सौदा नही करेगे
अपने जमीर का कभी हम सौदा नही करेगे
shabina. Naaz
तुमसे मैं प्यार करता हूँ
तुमसे मैं प्यार करता हूँ
gurudeenverma198
हमदम का साथ💕🤝
हमदम का साथ💕🤝
डॉ० रोहित कौशिक
जिस देश में लोग संत बनकर बलात्कार कर सकते है
जिस देश में लोग संत बनकर बलात्कार कर सकते है
शेखर सिंह
#शेर
#शेर
*Author प्रणय प्रभात*
सुस्ता लीजिये थोड़ा
सुस्ता लीजिये थोड़ा
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
काम-क्रोध-मद-मोह को, कब त्यागे इंसान
काम-क्रोध-मद-मोह को, कब त्यागे इंसान
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
श्रीराम
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
सत्य साधना -हायकु मुक्तक
सत्य साधना -हायकु मुक्तक
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
केवल पंखों से कभी,
केवल पंखों से कभी,
sushil sarna
"प्यार का रोग"
Pushpraj Anant
" मुझमें फिर से बहार न आयेगी "
Aarti sirsat
बहुत याद आती है
बहुत याद आती है
नन्दलाल सुथार "राही"
"बड़ा"
Dr. Kishan tandon kranti
अब क्या बताएँ छूटे हैं कितने कहाँ पर हम ग़ायब हुए हैं खुद ही
अब क्या बताएँ छूटे हैं कितने कहाँ पर हम ग़ायब हुए हैं खुद ही
Neelam Sharma
बेशक मां बाप हर ख़्वाहिश करते हैं
बेशक मां बाप हर ख़्वाहिश करते हैं
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
स्मृति : पंडित प्रकाश चंद्र जी
स्मृति : पंडित प्रकाश चंद्र जी
Ravi Prakash
तुममें और मुझमें बस एक समानता है,
तुममें और मुझमें बस एक समानता है,
सिद्धार्थ गोरखपुरी
तुम जिसे खुद से दूर करने की कोशिश करोगे उसे सृष्टि तुमसे मिल
तुम जिसे खुद से दूर करने की कोशिश करोगे उसे सृष्टि तुमसे मिल
Rashmi Ranjan
नववर्ष
नववर्ष
Mukesh Kumar Sonkar
खुदीराम बोस की शहादत का अपमान
खुदीराम बोस की शहादत का अपमान
कवि रमेशराज
रोजगार रोटी मिले,मिले स्नेह सम्मान।
रोजगार रोटी मिले,मिले स्नेह सम्मान।
विमला महरिया मौज
पसंद प्यार
पसंद प्यार
Otteri Selvakumar
घास को बिछौना बना कर तो देखो
घास को बिछौना बना कर तो देखो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
तुम्हें लिखना आसान है
तुम्हें लिखना आसान है
Manoj Mahato
रजनी कजरारी
रजनी कजरारी
Dr Meenu Poonia
Loading...