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26 Jul 2016 · 1 min read

अंदाजे इश्क़

बेफ़वाई की भी न थी वो शर्म सारी छोड़ बैठे
कस्मे तोड़ी भी न थी ,वो हदें सारी तोड़ बेठे
*********************************
रफ्ता-2 ही समझेंगे वो हमारा अंदाजे इश्क़
क्या हुआ जो नादानी में हमसे मुँह मोड़ बेठे
**********************************
कपिल कुमार
26/07/2016

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
280 Views
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