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Author: rekha rani

rekha rani
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मैं रेखा रानी एक शिक्षिका हूँ। मै उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ1 मे अपने ब्लॉक में मंत्री भी हूँ। मेरे दो प्यारे फूल (बच्चे) ,एक बाग़वान् अर्थात मेरे पति जो प्रतिपल मेरे साथ रहते हैं। मेरा शौक कविताये ,भजन,लेखन ,गायन, और प्रत्येक गतिविधि मे मुख्य भूमिका निभाना। मेरी उक्ति है कौन सो काज कठिन जगमाहि जो नही होत रेखा तुम पाही। आर्थात जो ठाना वो करना है। गृ हस्थ मे कविताएं न प्रकाशित कर पाईं

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

चाँद की रजाई

आज यह बादल क्यों फट गया गरीब की रजाई की तरह। या फिर किसी पांव [...]

23 वीं वर्षगांठ

दीपक बाति बनकर हम तुम घर -मन्दिर को प्रकाशित करेंगे। तुम [...]

गृहस्थ मंदिर की पुजारिन

आँ खों की उदासी न दिखा किसी को क्योंकि यह कमजोरी को बयां करती [...]

मां

प्रथम वन्दना मां है ,मां की आरती उतारें। मां के चरणों में [...]

शहीद का सिर

शत्रु ने बर्बरता से सैनिक का सिर जब काट लिया। कटे हुए सिर ने [...]

हर लम्हा खास है

मेरे दोस्त ज़िंदगी का हर लम्हा खास है। तू हर पल इस तरह जी बस [...]

ख्वाइशें

इसका उत्तर मेरे अंदाज़ मे ख्वाहिशें अपनी सभी साथ पूरी कर ए [...]

हमसफ़र

बचा जिंदगी का जो भी सफर है इसे साथ मिलकर तय करना पड़ेगा। मेरे [...]

मगरूर बादल

बादलों का नृप है अम्बर,डरता रहता बादल अक्सर। किन्तु कभी वह [...]

आवारा बादल

कहाँ उड़ चले, कहाँ उड़ चले, आवारा बादल कहाँ उड़ चले। लगता है बादल [...]

मेरा स्थानांतरण

मन मे लागी है लगन फिर खिलाना है चमन। मन तू होना न उदास मन कल तो [...]

बसंत पञ्चमी

नू तन वस्त्र धरा ने धारे सज गईं सभी दिशाएं धुंधली दिशाएं ओझल [...]

लिंकन के पत्र का काव्यरूपांतरण

सब जन जग मे न्यायी नहीं हैं और नही सब सच्चे होते। किन्तु उसे [...]

महा पर्व मतदान

मेरा देश बन रहा तू काम कर रहा है। चल काम छोड़ सारे मतदान करले [...]

जब बेटियां हमारी हमें छोड़ जाती हैं (विदाई).

नम हो जाती हैं ऑखें भर आती हैं जब बेटियां हमारी हमे छोड़ जाती [...]