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8 Apr 2023 · 1 min read

Wo veer purta jo rote nhi

Wo veer purta jo rote nhi
Jo hum jaise gharo me sote nhi
Jinki khushiya wo sard hava hai
Jinki masuka goliyo ki seva hai.
Jo kankad sa tap jate hai
Khud hi lash bankar
Dusro ki ifajat kar jate hai.
Jo bediyo se mukta ho kar
Ped ke saman lahrate hai
Kar dete h khud ko havale vatan ke
Chaddar khadi ki silwate hai
Odh kar sare samaj ka dayitwa
Jo ek roj kahi dur udd jate hai
Rah jati h unke jinda hone ki khusboo
Jo mar kar bhi amar kahlate hai.
Unke ahsano ke bojh tale,
Hum pal pal dabte jate hai.
Hum rahte hai kaid imarat me
Wo khuli fiza ban jate hai .
Hum shok manate hai dukh ka
Wo dushmano ko dhul chatate hai.
Ek hind ke do prani hum
Fir bhi antar bhawnao me pate hai.

1 Like · 2 Comments · 549 Views
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