Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Jul 2021 · 2 min read

Premonition

Premonition is the foresight of happening before hand and it’s incidence is of flash devoid of preconception / premeditation.
Premonition is the extra sensory perception in any living being gifted by nature and it’s origin source is still unknown and debatable.
In common speaking it is also termed as sixth sense , which is inherent and not acquired from external source and never expertised through practice .
This quality is observed in animals also , who tend to behave indifferently before onslaught of any danger/ calamity sensing through their sixth sense provided by nature .
In domesticated animals like dogs, horse , cat ,cows ,,fish , and bird like parrot , pigeon, quill , geese , owl , hawk and eagle this sense is observed over a period of time .
In human beings there are certain individuals who have been gifted by this supernatural power irrespective of their experience , social status, educational or religious background . These individuals also do not know how and why this foresight happen as a flash in their mind without any preconceived thought of future happenings .
In this context it is worth mentioning that gravity of such future episode is true to the reality without any quantum of addition / interpretation .
But there are some individuals who in guise of such powers ; often mislead the people for their ulterior motives and benefits.
Therefore true identification of individuals with such powers is a tedious task, which have to be arrived after constant watch of their premonition foresight and analyzing on right platform of reasoning and gravity of reality before arriving at any conclusion and taking preventive measures and action on such advise.

Language: English
Tag: Article
1 Like · 2 Comments · 417 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Shyam Sundar Subramanian
View all
You may also like:
दिल तोड़ना ,
दिल तोड़ना ,
Buddha Prakash
*देश की आत्मा है हिंदी*
*देश की आत्मा है हिंदी*
Shashi kala vyas
ईव्हीएम को रोने वाले अब वेलेट पेपर से भी नहीं जीत सकते। मतपत
ईव्हीएम को रोने वाले अब वेलेट पेपर से भी नहीं जीत सकते। मतपत
*Author प्रणय प्रभात*
सत्साहित्य कहा जाता है ज्ञानराशि का संचित कोष।
सत्साहित्य कहा जाता है ज्ञानराशि का संचित कोष।
महेश चन्द्र त्रिपाठी
*रक्तदान*
*रक्तदान*
Dushyant Kumar
हम न रोएंगे अब किसी के लिए।
हम न रोएंगे अब किसी के लिए।
सत्य कुमार प्रेमी
दीपक इसलिए वंदनीय है क्योंकि वह दूसरों के लिए जलता है दूसरो
दीपक इसलिए वंदनीय है क्योंकि वह दूसरों के लिए जलता है दूसरो
Ranjeet kumar patre
"धीरे-धीरे"
Dr. Kishan tandon kranti
राजकुमारी
राजकुमारी
Johnny Ahmed 'क़ैस'
जैसी सोच,वैसा फल
जैसी सोच,वैसा फल
Paras Nath Jha
प्रभु के प्रति रहें कृतज्ञ
प्रभु के प्रति रहें कृतज्ञ
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
3310.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3310.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
मान बुजुर्गों की भी बातें
मान बुजुर्गों की भी बातें
Chunnu Lal Gupta
माँ का जग उपहार अनोखा
माँ का जग उपहार अनोखा
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
प्रेम और घृणा से ऊपर उठने के लिए जागृत दिशा होना अनिवार्य है
प्रेम और घृणा से ऊपर उठने के लिए जागृत दिशा होना अनिवार्य है
Ravikesh Jha
*जरा सोचो तो जादू की तरह होती हैं बरसातें (मुक्तक) *
*जरा सोचो तो जादू की तरह होती हैं बरसातें (मुक्तक) *
Ravi Prakash
हमें लगा  कि वो, गए-गुजरे निकले
हमें लगा कि वो, गए-गुजरे निकले
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
स्वयं को तुम सम्मान दो
स्वयं को तुम सम्मान दो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
अहसास तेरे होने का
अहसास तेरे होने का
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
आप लोग अभी से जानवरों की सही पहचान के लिए
आप लोग अभी से जानवरों की सही पहचान के लिए
शेखर सिंह
हर बात हर शै
हर बात हर शै
हिमांशु Kulshrestha
बिन मौसम के ये बरसात कैसी
बिन मौसम के ये बरसात कैसी
Ram Krishan Rastogi
गीत
गीत
Shiva Awasthi
राजाधिराज महाकाल......
राजाधिराज महाकाल......
Kavita Chouhan
न दिया धोखा न किया कपट,
न दिया धोखा न किया कपट,
Satish Srijan
नज़र को नज़रिए की तलाश होती है,
नज़र को नज़रिए की तलाश होती है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
गर्मी आई
गर्मी आई
Dr. Pradeep Kumar Sharma
सुख की तलाश आंख- मिचौली का खेल है जब तुम उसे खोजते हो ,तो वह
सुख की तलाश आंख- मिचौली का खेल है जब तुम उसे खोजते हो ,तो वह
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
मैं को तुम
मैं को तुम
Dr fauzia Naseem shad
माँ
माँ
SHAMA PARVEEN
Loading...