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8 Jul 2016 · 1 min read

गुण क्या गाऊँ मैं कनहल के

पीले फूल लगें मखमल से
गुण क्या गाऊँ मैं कनहल के
भीनी भीनी खुशबू प्यारी
दिल झूमे जब जाऊँ क्यारी
तोडूँ फूल लटकर डाली
देख मुझे चिल्लाता माली
पवन चले हल्के हल्के
पीले फूल लगें मखमल से
माँ मेरी जब मन्दिर जाए
पीले पीले फूल चढ़ाये
उन फूलों से हार बनाते
खुशी खुशी त्यौहार मनाते
वे प्यारे दिन बचपन के
पीले फूल लगें मखमल से
कनहल की डाली झूली है
फूलों ने क्यारी छू ली है
धूप छाँह की सीढ़ी चढ़ते
हरे भरे पत्तों पर पड़ते
छीटें शुभ निर्मल जल के
पीले फूल लगें मखमल से
गुण क्या गाऊँ मैं कनहल के

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