Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
8 Jul 2016 · 1 min read

आओ बैठो तुम्हे सुनाये एक कहानी बाबू जी !

आओ बैठो तुम्हे सुनाये एक कहानी बाबू जी !
झरता है तो झर जाने दो आँख का पानी बाबू जी !!

देख गरीबी सबने मुझको जी भरके दुत्कारा था,
जी भरके रोते देखा था रोशनदानी बाबू जी !!

फुटपाथों पर सोते सोते सुंदर सपना देखा था,
पाँच सितारा में खाते है दाल मखानी बाबू जी !!

गांव मुहल्ले के कहते थे कोई ना पूछेगा तुझको,
देखो सुंदर मेरे सपनो की मिल गई रानी बाबू जी !!

बात बात में नानी जी से करके आया था वादा,
किसे घुमाऊ कार से अपने मर गई नानी बाबू जी !!

साफ़ नीयत सच्चे ईमान से रहना तू मेरे जुगनू,
आप ने ऐसी बात कहीं थी बहुत पुरानी बाबू जी !!

8871887126

Loading...