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8 Sep 2025 · 1 min read

दिल से हर एक गम निकल जाए

दिल से हर एक गम निकल जाए
अब दुआ है कि दम निकल जाए

पूछिए उस पे क्या गुजरती है
बेवफा जब सनम निकल जाए

फायदा क्या है कद बढ़ाने का
तोलने पर जो कम निकल जाए

हर जगह ठोकरें ही मिलती है
हाथ से जब क़लम निकल जाए

राहे-मंज़िल में रोशनी भर दो
तीरगी का भरम निकल जाए

ज़ख़्म गहरे हैं, दर्द बेहिस है
आरजू है कि दम निकल जाए

ग़म की बारिश थमे, तो मुमकिन है
काश, ये शामे गम निकल जाए

गम सुलगते हैं रोज़ ही अरशद
काश सीने से गम निकल जाए

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