दिल से हर एक गम निकल जाए
दिल से हर एक गम निकल जाए
अब दुआ है कि दम निकल जाए
पूछिए उस पे क्या गुजरती है
बेवफा जब सनम निकल जाए
फायदा क्या है कद बढ़ाने का
तोलने पर जो कम निकल जाए
हर जगह ठोकरें ही मिलती है
हाथ से जब क़लम निकल जाए
राहे-मंज़िल में रोशनी भर दो
तीरगी का भरम निकल जाए
ज़ख़्म गहरे हैं, दर्द बेहिस है
आरजू है कि दम निकल जाए
ग़म की बारिश थमे, तो मुमकिन है
काश, ये शामे गम निकल जाए
गम सुलगते हैं रोज़ ही अरशद
काश सीने से गम निकल जाए