बादल राजा
बादल राजा
-क्षेत्रपाल शर्मा
02 जुलाई 2025
नभ में हंस सरीखे बादल ,
कैसे उड़कर -तैर रहे हैं ।।
यदि ये होते अपने पास ,
इन पर खूब सवारी करते,
तरह तरह से इन्हें सजाते ,
कई तरह के हम रंग भरते।
रस, हरियाली के संदेशे
लेकर नभ में फहर रहे हैं ।।
बूंदाबांदी हल्की-फुल्की ,
कहीं झमाझम ढोल बजाते,
कहीं -कहीं तो बूंद नहीं पर,
कहीं-कहीं बिल्कुल फट जाते ।
लगता कठिन सवारी इनकी,
नहीं कहीं ये ठहर रहे हैं।।
तीज -सनूने वाले झूले,
खीर ,सेंवईं शगुनी मेला,
रंग -बिरंगी कांच चूड़ियां,
गुब्बारों का मनहर ठेला ।
बादल राजा आओ पास ,
पलक पांवड़े बुहर रहे हैं ।।
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