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3 Jul 2025 · 1 min read

बादल राजा

बादल राजा

-क्षेत्रपाल शर्मा
02 जुलाई 2025

नभ में हंस सरीखे बादल ,
कैसे उड़कर -तैर रहे हैं ।।

यदि ये होते अपने पास ,
इन पर खूब सवारी करते,
तरह तरह से इन्हें सजाते ,
कई तरह के हम रंग भरते।

रस, हरियाली के संदेशे
लेकर नभ में फहर रहे हैं ।।

बूंदाबांदी हल्की-फुल्की ,
कहीं झमाझम ढोल बजाते,
कहीं -कहीं तो बूंद नहीं पर,
कहीं-कहीं बिल्कुल फट जाते ।

लगता कठिन सवारी इनकी,
नहीं कहीं ये ठहर रहे हैं।।

तीज -सनूने वाले झूले,
खीर ,सेंवईं शगुनी मेला,
रंग -बिरंगी कांच चूड़ियां,
गुब्बारों का मनहर ठेला ।

बादल राजा आओ पास ,
पलक पांवड़े बुहर रहे हैं ।।
( ई मेल: kpsharma05@gmail.com
संपर्क : 19/17 ,शांतिपुरम , सासनी गेट ,अलीगढ़)

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