दुर्भाग्य
हिंद की
पावन धरती पर
हिंदी बोलने वाला
पिट रहा है
जैसे माँ की गोद में
लेटा
अबोध शिशु
‘माँ’
बोलने का
दंश
झेल रहा है।
दुर्भाग्य है यह मेरा
दुर्भाग्य
उनका भी
हिंद की नींव को अब
दीम चख रहा है।
–अनिल मिश्र
हिंद की
पावन धरती पर
हिंदी बोलने वाला
पिट रहा है
जैसे माँ की गोद में
लेटा
अबोध शिशु
‘माँ’
बोलने का
दंश
झेल रहा है।
दुर्भाग्य है यह मेरा
दुर्भाग्य
उनका भी
हिंद की नींव को अब
दीम चख रहा है।
–अनिल मिश्र