ज़मीन छोड़ती है न , पानी में जाने की चाहत,

ज़मीन छोड़ती है न , पानी में जाने की चाहत,
अजीब कशमकश है, ये ज़िन्दगी हो आहत,
दिखे हैं ख्वाब हमको ,खुली आँखो से अकसर
मगर एहसास होता है,जब मिलती नहीं है ये राहत।
✍️नील रूहानी…
ज़मीन छोड़ती है न , पानी में जाने की चाहत,
अजीब कशमकश है, ये ज़िन्दगी हो आहत,
दिखे हैं ख्वाब हमको ,खुली आँखो से अकसर
मगर एहसास होता है,जब मिलती नहीं है ये राहत।
✍️नील रूहानी…