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25 May 2023 · 1 min read

Kohre ki bunde chhat chuki hai,

Kohre ki bunde chhat chuki hai,
Resham si dulhan sajj chuki hai ,
Ghode pe sundar var ki khoj me,
Bitiya rani nikal padi hai.
Kya khabar use ye sundarta,
Kis bhejiye ka rup dhare hai,
Baitha hai smaj ka katil darak me,
Khanjar banjar dil me liye hue.
Bitiya ne abhi nyi kadam se

jb pahli shuruat kiya
Katil bhediye ne uska ,
Khuch pal bada sath diya.
Jivan ke maryada ka bandhan
Jb ladki ne mag kiya
Tukde me kata katil ne
Aur samaj ne us ladki ho hi badnam kiya.
Wo bhediya abhi bhi ghum rha hai
Swatantra nya shikar dhudh rha hai.
Ab samaj ko jagane ki bajaye,
Apne ghar ki betiyo ko jagana hai.
Kadam se kadam bhi milana hai,
Aur khud ki maryada bachana hai.
Dangal me bheed kar raho me
Nye phool bhi khilana hai.
Ab ruswai ka gam bhula kar,
Apni rah me chalte jana hai.

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