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15 May 2024 · 1 min read

3458🌷 *पूर्णिका* 🌷

3458🌷 पूर्णिका 🌷
जीत का परचम लहराते रहे
212 22 22 212
जीत का परचम लहराते रहे।
काम भी हरदम सहराते रहे।।
चाह से मिलती अपनी मंजिलें।
देख दुनिया हम महकाते रहे।।
जिंदगी सुंदर सपनों में यहाँ ।
रोज मन अपना बहलाते रहे।।
प्यार मिलता है सच में किस्मत से।
यूं रिश्ता दिल का गहराते रहे।।
गम नहीं खेदू खुशियांँ बांटते।
यार दर्द से ना कहराते रहे।।
……✍ डॉ .खेदू भारती “सत्येश “
15-05-2024 बुधवार

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