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6 Oct 2023 · 1 min read

2565.पूर्णिका

2565.पूर्णिका
🌹 जान कर अनजान क्यूं 🌹
212 2212
जानकर अनजान क्यूं ।
भूलते पहचान क्यूं ।।
ये रिश्ता है प्यार का।
फिर यहाँ नादान क्यूं ।।
रोज महके जिंदगी ।
बालम परेशान क्यूं ।।
यूं मिले तकदीर से ।
सब करें कुरबान क्यूं ।
दे खुशी खेदू जहाँ ।
ना रखे अरमान क्यूं ।।
……….✍डॉ .खेदू भारती”सत्येश”
6-10-2123शुक्रवार

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