Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Aug 2023 · 1 min read

2323.पूर्णिका

2323.पूर्णिका
🌷जब से मिली हो जिंदगी महक उठी है 🌷
2212 2212 22 22
जब से मिली हो जिंदगी महक उठी है
ये प्यार के मन पंछियां चहक उठी है ।।
सारा जमाना देखके यूं इठलाता।
अब गम नहीं खुशियाँ यहाँ लहक उठी है ।।
होने लगी हर ख्वाहिशें सच में पूरी ।
मदहोश होकर कदम भी बहक उठी है ।।
देते सहारा दीन दुखियों की आँखें हम ।
अपनी जज़्बातें शान से दहक उठी है ।।
नवरंग में रंगे जहाँ हरदम खेदू ।
गाते तराने किस्मत भी चमक उठी है ।।
………..✍डॉ .खेदू भारती”सत्येश”
4-8-2023शुक्रवार

1 Like · 193 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
...........,,
...........,,
शेखर सिंह
मैं और मेरी तन्हाई
मैं और मेरी तन्हाई
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
समय
समय
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
उम्रभर
उम्रभर
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
अज़ीज़ टुकड़ों और किश्तों में नज़र आते हैं
अज़ीज़ टुकड़ों और किश्तों में नज़र आते हैं
Atul "Krishn"
लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लिया
लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लिया
अंसार एटवी
लम्बा पर सकडा़ सपाट पुल
लम्बा पर सकडा़ सपाट पुल
Seema gupta,Alwar
यूनिवर्सिटी के गलियारे
यूनिवर्सिटी के गलियारे
Surinder blackpen
देखना हमको
देखना हमको
Dr fauzia Naseem shad
मेरी कलम से…
मेरी कलम से…
Anand Kumar
If our kids do not speak their mother tongue, we force them
If our kids do not speak their mother tongue, we force them
DrLakshman Jha Parimal
वक्त का सिलसिला बना परिंदा
वक्त का सिलसिला बना परिंदा
Ravi Shukla
मारुति मं बालम जी मनैं
मारुति मं बालम जी मनैं
gurudeenverma198
रहे हरदम यही मंजर
रहे हरदम यही मंजर
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
मूक संवेदना...
मूक संवेदना...
Neelam Sharma
ये मानसिकता हा गलत आये के मोर ददा बबा मन‌ साग भाजी बेचत रहिन
ये मानसिकता हा गलत आये के मोर ददा बबा मन‌ साग भाजी बेचत रहिन
PK Pappu Patel
■ मुक्तक
■ मुक्तक
*प्रणय प्रभात*
* यौवन पचास का, दिल पंद्रेह का *
* यौवन पचास का, दिल पंद्रेह का *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ट्रस्टीशिप-विचार / 1982/प्रतिक्रियाएं
ट्रस्टीशिप-विचार / 1982/प्रतिक्रियाएं
Ravi Prakash
---माँ---
---माँ---
Rituraj shivem verma
जीत और हार ज़िंदगी का एक हिस्सा है ,
जीत और हार ज़िंदगी का एक हिस्सा है ,
Neelofar Khan
करुण पुकार
करुण पुकार
Pushpa Tiwari
बदलती फितरत
बदलती फितरत
Sûrëkhâ
जख्म भरता है इसी बहाने से
जख्म भरता है इसी बहाने से
Anil Mishra Prahari
* मंजिल आ जाती है पास *
* मंजिल आ जाती है पास *
surenderpal vaidya
छुपा है सदियों का दर्द दिल के अंदर कैसा
छुपा है सदियों का दर्द दिल के अंदर कैसा
VINOD CHAUHAN
23/126.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/126.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
रेत और जीवन एक समान हैं
रेत और जीवन एक समान हैं
राजेंद्र तिवारी
आया तीजो का त्यौहार
आया तीजो का त्यौहार
Ram Krishan Rastogi
सावन मे नारी।
सावन मे नारी।
Acharya Rama Nand Mandal
Loading...