Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Oct 2023 · 1 min read

23/110.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*

23/110.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
🌷 अपन बना डर मोला🌷
22 22 22
अपन बना डर मोला।
बिकट मया हे तोला।।
रास रचा ले संगी ।
तार जही ये चोला।।
अंतस के पीरा का।
फूट जही बम गोला।।
घाम पियास नईये।
झांझ अउ इहां झोला ।।
सोचे समझे खेदू ।
दुनिया जानय भोला ।।
………..✍डॉ .खेदू भारती”सत्येश”
31-10-2023मंगलवार

158 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*मुहब्बत के मोती*
*मुहब्बत के मोती*
आर.एस. 'प्रीतम'
दोस्ती ना कभी बदली है ..न बदलेगी ...बस यहाँ तो लोग ही बदल जा
दोस्ती ना कभी बदली है ..न बदलेगी ...बस यहाँ तो लोग ही बदल जा
DrLakshman Jha Parimal
गरम समोसा खा रहा , पूरा हिंदुस्तान(कुंडलिया)
गरम समोसा खा रहा , पूरा हिंदुस्तान(कुंडलिया)
Ravi Prakash
बेटी एक स्वर्ग परी सी
बेटी एक स्वर्ग परी सी
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
When you learn to view life
When you learn to view life
पूर्वार्थ
मुक्तक
मुक्तक
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
"अजीब दस्तूर"
Dr. Kishan tandon kranti
नहीं देखी सूरज की गर्मी
नहीं देखी सूरज की गर्मी
Sonam Puneet Dubey
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बालको से पग पग पर अपराध होते ही रहते हैं।उन्हें केवल माता के
बालको से पग पग पर अपराध होते ही रहते हैं।उन्हें केवल माता के
Shashi kala vyas
मैं कभी किसी के इश्क़ में गिरफ़्तार नहीं हो सकता
मैं कभी किसी के इश्क़ में गिरफ़्तार नहीं हो सकता
Manoj Mahato
।। परिधि में रहे......।।
।। परिधि में रहे......।।
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
भाव - श्रृँखला
भाव - श्रृँखला
Shyam Sundar Subramanian
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelofar Khan
*** चोर ***
*** चोर ***
Chunnu Lal Gupta
रात बदरिया...
रात बदरिया...
डॉ.सीमा अग्रवाल
बेचैनी तब होती है जब ध्यान लक्ष्य से हट जाता है।
बेचैनी तब होती है जब ध्यान लक्ष्य से हट जाता है।
Rj Anand Prajapati
ऋतुराज
ऋतुराज
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
When the ways of this world are, but
When the ways of this world are, but
Dhriti Mishra
23/218. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/218. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ख़ामोशी
ख़ामोशी
कवि अनिल कुमार पँचोली
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
औरतें
औरतें
Kanchan Khanna
यहां ज्यादा की जरूरत नहीं
यहां ज्यादा की जरूरत नहीं
Swami Ganganiya
Ghazal
Ghazal
shahab uddin shah kannauji
युद्ध नहीं अब शांति चाहिए
युद्ध नहीं अब शांति चाहिए
लक्ष्मी सिंह
उफ ये सादगी तुम्हारी।
उफ ये सादगी तुम्हारी।
Taj Mohammad
आतंकवाद सारी हदें पार कर गया है
आतंकवाद सारी हदें पार कर गया है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
#लघुकथा-
#लघुकथा-
*प्रणय प्रभात*
कोई बात नहीं देर से आए,
कोई बात नहीं देर से आए,
Buddha Prakash
Loading...