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11 May 2017 · 1 min read

‘सहज’ के दो मुक्तक

1.
मुक्तक :
000
कर्म में विस्वाश कर.
तनिक दिल में धीर धर.
राह कितनी भी कठिन,
ध्यान केवल लक्ष्य पर.
000
2.
कर्म बिना है, फल नहीं.
सिर्फ ‘आज’ है, ‘कल’ नहीं.
रिश्तों में बस प्रेम ही,
जाति-धर्म या दल नहीं .
@डॉ.रघुनाथ मिश्र ‘सहज’
अधिवक्ता/साहित्यकार
सर्वाधिकार सुरक्षित
संपर्क :3-k-30,तलवंडी,कोटा-324005 (राजस्थान)
09214313946

Language: Hindi
605 Views

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