Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Oct 2022 · 1 min read

सजनाँ बिदेशिया निठूर निर्मोहिया, अइले ना सजना बिदेशिया।

सजनाँ बिदेशिया निठूर निर्मोहिया, अइले ना सजना बिदेशिया।
रोंअत तिवइया कहे सुनऽ मइया, अइले न सजना बिदेशिया।।

हुक उठे मनवाँ, सुन बा भवनवाँ, उसर लागेला सगरो जहानवाँ।
छोड़ि के गइलऽ, निर्मोही भइलऽ, तनिका ना भावेला गहनवाँ।
सुपवा किनाइल ना, ऊखवाँ कटाइल, बुझे ना पिया परदेशिया।
रोंअत तिवइया कहे सुनऽ मइया, अइले न सजना बिदेशिया।।

नयना के कोरवा, भिगावेला लोरवा, हमरो हेराइल बा सनेहिया।
कुहके तिवइया, सुनऽ मोरि मइया, देई देतु मोहे थोड़ नेहिया।
मनितऽ कहनवा तू अइत सजनवा, काटीं बोलऽ कबले कलेशिया।
रोंअत तिवइया कहे सुनऽ मइया, अइले न सजना बिदेशिया।।

छोड़ि के शहरिया बनिती कहरिया, सजना जी बाँस के बहंगिया।
घटवा पऽ अइती, अछतऽ चढ़इतीं, पान फूल फल आ लवंगिया।
छोड़ि देतीं हठवा, सुनऽ लागे घटवा, परबऽ सचिन हऽ ई देशिया।
रोंअत तिवइया कहे सुनऽ मइया, अइले न सजना बिदेशिया।।

✍️ सजीव शुक्ल ‘सचिन’

1 Like · 355 Views
Books from संजीव शुक्ल 'सचिन'
View all

You may also like these posts

दोहा ग़ज़ल
दोहा ग़ज़ल
आर.एस. 'प्रीतम'
1,सदा रखेंगे मान गर्व से ये सर उठा रहा।
1,सदा रखेंगे मान गर्व से ये सर उठा रहा।
Jyoti Shrivastava(ज्योटी श्रीवास्तव)
लेखक कि चाहत
लेखक कि चाहत
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
चंचल मोर सा मन
चंचल मोर सा मन
SATPAL CHAUHAN
4540.*पूर्णिका*
4540.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ग़ज़ल के क्षेत्र में ये कैसा इन्क़लाब आ रहा है?
ग़ज़ल के क्षेत्र में ये कैसा इन्क़लाब आ रहा है?
कवि रमेशराज
याद करने के लिए बस यारियां रह जाएंगी।
याद करने के लिए बस यारियां रह जाएंगी।
सत्य कुमार प्रेमी
बेटी का हक़
बेटी का हक़
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी "
सपनों की उड़ान
सपनों की उड़ान
meenu yadav
आषाढ़ के मेघ
आषाढ़ के मेघ
Saraswati Bajpai
"बहनों के संग बीता बचपन"
Ekta chitrangini
■ आज का शेर-
■ आज का शेर-
*प्रणय*
माँ वीणावादिनी
माँ वीणावादिनी
Girija Arora
शीर्षक: स्वप्न में रोटी
शीर्षक: स्वप्न में रोटी
Kapil Kumar Gurjar
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelofar Khan
यक्षिणी-24
यक्षिणी-24
Dr MusafiR BaithA
दोहे
दोहे
seema sharma
ముందుకు సాగిపో..
ముందుకు సాగిపో..
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
आज  कई  परेशानियों से घिरा हुआ इंसान।
आज कई परेशानियों से घिरा हुआ इंसान।
Ajit Kumar "Karn"
मातु काल रात्रि
मातु काल रात्रि
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
आनंदित जीवन
आनंदित जीवन
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
अधूरा नहीं
अधूरा नहीं
Rambali Mishra
औरों के लिए सोचना अब छोड़ दिया हैं ,
औरों के लिए सोचना अब छोड़ दिया हैं ,
rubichetanshukla 781
अच्छे करते मेहनत दिन-रात
अच्छे करते मेहनत दिन-रात
Acharya Shilak Ram
Keep On Trying!
Keep On Trying!
R. H. SRIDEVI
आज़ पानी को तरसते हैं
आज़ पानी को तरसते हैं
Sonam Puneet Dubey
पधारो मेरे प्रदेश तुम, मेरे राजस्थान में
पधारो मेरे प्रदेश तुम, मेरे राजस्थान में
gurudeenverma198
"सदाकत ए जहां"
ओसमणी साहू 'ओश'
चुनाव
चुनाव
Shashi Mahajan
चाबी घर की हो या दिल की
चाबी घर की हो या दिल की
शेखर सिंह
Loading...