Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Dec 2023 · 1 min read

सखी या आँसू छंद

सखी या आँसू छंद
14 मात्रायें 3 चौकल
अंत में यगण या मगण।
***
भिखारी की भूख
×××××××××××××
घर से ज्यों बाहर आए,
देखा है एक भिखारी।
लगता था भूखा प्यासा,
जो भोग रहा लाचारी।
मैं पास गया फिर उसके,
अति प्रेम जता यह पूछा।
किस कारण पथ में लेटे,
वह उत्तर देता छूछा ।

परसों से कुछ खाने को,
मिल पाया है ना दाना ।
अटकी है सांस कहाँ पर,
मैंने अबतक ना जाना।
चलने फिरने की ताकत,
किंचित न बची है तन में।
लगता है यम आ पहुँचे,
जा प्रान रहे हर छन में।

इस वृद्धापन के मारे,
मेरा यह हाल किया है।
बेटे ने सबकुछ लेकर,
रस्ते में डाल दिया है।
कैसे बतलाऊँ तुमको,
निर्माण किया मर मर है।
हूँ जिसको छोड़ सड़क पर,
मेरा भी अपना घर है।

ऐसे कैसे मर जाओ,
जीवन ना जाने दूँगा।
केवल रोटी के कारण,
यम को ना आने दूँगा।
बैठाल उसे छाया में,
भरभेट कराया भोजन।
आशीष लगा वह देने,
लख होता खास प्रयोजन।

सबको दे भगवन रोटी,
यह वक्त कभी ना आए।
कोई भी भूखा प्यासा।
तेरी दुनियां से जाये।।
बस यही प्रार्थना लेकर,
चरणों में सिर धरते हैं,
कट जाय बुढ़ापा सुख से,
अब बंद कलम करते हैं।

गुरू सक्सेना
नरसिंहपुर मध्यप्रदेश
2/12/23

Language: Hindi
148 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मेरी मायूस सी
मेरी मायूस सी
Dr fauzia Naseem shad
वक्त गिरवी सा पड़ा है जिंदगी ( नवगीत)
वक्त गिरवी सा पड़ा है जिंदगी ( नवगीत)
Rakmish Sultanpuri
गए थे दिल हल्का करने,
गए थे दिल हल्का करने,
ओसमणी साहू 'ओश'
मुझे सहारा नहीं तुम्हारा साथी बनना है,
मुझे सहारा नहीं तुम्हारा साथी बनना है,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
2460.पूर्णिका
2460.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
है कहीं धूप तो  फिर  कही  छांव  है
है कहीं धूप तो फिर कही छांव है
कुंवर तुफान सिंह निकुम्भ
॰॰॰॰॰॰यू॰पी की सैर॰॰॰॰॰॰
॰॰॰॰॰॰यू॰पी की सैर॰॰॰॰॰॰
Dr. Vaishali Verma
सुंदरता के मायने
सुंदरता के मायने
Surya Barman
रोजी न रोटी, हैं जीने के लाले।
रोजी न रोटी, हैं जीने के लाले।
सत्य कुमार प्रेमी
माँ
माँ
Dr Archana Gupta
कौन कितने पानी में
कौन कितने पानी में
Mukesh Jeevanand
"सुर्खी में आने और
*Author प्रणय प्रभात*
*बस यह समझो बॅंधा कमर पर, सबके टाइम-बम है (हिंदी गजल)*
*बस यह समझो बॅंधा कमर पर, सबके टाइम-बम है (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
पावस
पावस
लक्ष्मी सिंह
समंदर चाहते है किनारा कौन बनता है,
समंदर चाहते है किनारा कौन बनता है,
Vindhya Prakash Mishra
ख्वाहिशों की ना तमन्ना कर
ख्वाहिशों की ना तमन्ना कर
Harminder Kaur
****शिव शंकर****
****शिव शंकर****
Kavita Chouhan
साहब का कुत्ता (हास्य-व्यंग्य कहानी)
साहब का कुत्ता (हास्य-व्यंग्य कहानी)
दुष्यन्त 'बाबा'
दीवाली
दीवाली
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
मोहब्बत का ज़माना आ गया है
मोहब्बत का ज़माना आ गया है
Surinder blackpen
सब अपनो में व्यस्त
सब अपनो में व्यस्त
DrLakshman Jha Parimal
सुशब्द बनाते मित्र बहुत
सुशब्द बनाते मित्र बहुत
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
शुभ रात्रि मित्रों
शुभ रात्रि मित्रों
आर.एस. 'प्रीतम'
"सहर देना"
Dr. Kishan tandon kranti
मुस्कराओ तो फूलों की तरह
मुस्कराओ तो फूलों की तरह
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
मैथिली पेटपोसुआ के गोंधियागिरी?
मैथिली पेटपोसुआ के गोंधियागिरी?
Dr. Kishan Karigar
घणो लागे मनैं प्यारो, सखी यो सासरो मारो
घणो लागे मनैं प्यारो, सखी यो सासरो मारो
gurudeenverma198
विद्यार्थी के मन की थकान
विद्यार्थी के मन की थकान
पूर्वार्थ
कलयुग मे घमंड
कलयुग मे घमंड
Anil chobisa
मंजिल
मंजिल
Kanchan Khanna
Loading...