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16 Feb 2022 · 6 min read

अगस्त क्रांति शहीद रामफल मंडल: जीवन वृत।

अगस्त क्रांति शहीद रामफल मंडल:जीवन वृत

-आचार्य रामानंद मंडल

बिहार में अगस्त क्रांति अंतर्गत फांसी पर लटके वाला सात शहीद में एकटा आ मिथिला अन्तर्गत जिला सीतामढ़ी के पहिला शहीद रामफल मंडल रहथिन।

महान् क्रान्तिकारी अमर शहीद रामफल मंडल 06 अगस्त 1924 के सीतामढ़ी जिला के बाजपट्टी थाना के मधुरापुर गांव में धनुवंशी धानुक कुल मे पिता गोखुल मंडल आ माता गरबी देवी के पुत्र रत्न के रूप में पैदा होयल रहे। रामफल मंडल चारि भाई में तेसर रहथिन।पहिला रामशरण मंडल,दोसर मंहथ मंडल आ चौथम मिश्री मंडल रहे।सभ भाई कुश्ती खेले आ किसानी करे।माल-जाल पोस के आ वोकर खरीद-बेच करके अपन आमदनी जुटावत रहे।हुनकर बाबूजी गांव में एकटा किराना के दोकान चलबैत रहथिन।वो14 बरख के उमर में मिडिल पास कर गेल रहथिन।पहलवानी के चलते इनकर देह कसल रहे।5’5”के गोर देह,चमकैत आंखि,भव्य लिलार आ औंठिया केश सहजैय मन मोहे वाला रहे।चेहरा हंसमुख, सौम्य, मृदुभाषी,साहसी आ रोबदार रहे।17बरख के उमर में सीतामढ़ी जिला के रुन्नीसैदपुर थाना भीतैर गंगवारा निवासी अमीन मंडल के बेटी जगपतिया देवी से विआह भेल रहे।वो धार्मिक आ दयालु महिला रहथिन।विआह के एक बरिस बाद 15सितम्बर 1942के दिन हुनका एकटा पुत्र रत्न भेल रहे जौं रामफल मंडल जेहल में रहथि।

अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन सर्वसम्मति सं गांधी जी के अगुआई आ अब्दुल कलाम आजाद के सभापतित्व में 08अगस्त1942 के एकटा प्रस्ताव पास कैलन रहे जे समूचा देश में भारत छोड़ो आन्दोलन वा अगस्त क्रांति के नाम से जानल जाय हैय।जे इतिहास के पन्ना में स्वार्णांकित हैय।

अगस्त क्रांति के ज्वाला के लपट पूरा हिंदुस्तान के अपना आगोश में ले ले रहैय। मधुरापुर के युवक विन्देश्वरी प्रसाद गांव में एकटा सभा कैलकआ आजादी के लड़ाई लड़ें लेल रामफल मंडल के नेतृत्व में एकटा युवा दल के स्थापना कैलन।हरिहर प्रसाद, कपिल देव सिंह, शत्रुघ्न सिंह,मुनेश्वर सिंह,श्री कृष्ण प्रसाद,रामप्रीत साह,फूलवारी मंडल, सहजानंद शर्मा, भुवनेश्वर राय आ जनार्दन झा आदि अई युवा दल के सदस्य रहथिन।तै समय के पुपरी थाना के दरोगा अर्जून सिंह के अत्याचार आ अनाचार से थाना के जनता तबाह रहे।अइसे जनता बौखला गेल रहे।

19अगस्त1942के दिन अंग्रेजी सिपाही खादी भंडार,बाबा नरसिंह दास,रामनंदन सिंह आ मोहन सिंह के घर जला देलक।पता चलल कि24अगस्त 1942के दिन उत्पात मचावे आतातायी दरोगा अर्जून सिंह बाजपट्टी आबे बाला हैय। आंदोलनकारी एगो गुप्त मिंटीग बनगांव में कैलन आ वीर रामफल के नेतृत्व में कथित देश के गद्दार दरोगा अर्जून सिंह के देश के आजादी के राह से हटावे के शपथ ले लेलन।बैठक में बाबा नरसिंह दास, सकलदेव कुंवर,रामबुझावन ठाकुर,हरिहर प्रसाद, विन्देश्वरी प्रसाद आ वीर रामफल मंडल आदि सम्मिलित रहलन।

24अगस्त 1942 के दिन आतातायी दरोगा अर्जून सिंह कोहराम मचाबे बाजपट्टी आबे बाला रहे।परंच युवा दल के मंशा वो गुप्त रुप से जान गेल।त अर्जून सिंह कोनो बहाना बनाके अपने न आयल आ क्रूर आतातायी अंग्रेजी हुकूमत के एसडीओ हरदीप नारायण सिंह, पुलिस इंस्पेक्टर राममूर्ति झा पुलिस श्याम लाल सिंह, चपरासी दरवेशी सिंह आ ड्राइवर आदित्य राम के युवा दल के आंदोलन के कुचले के लेल भेज देलक।

बाजपट्टी चौक पर रामफल मंडल के नेतृत्व में आंदोलनी लाठी , डंडा,भाला,बरछी, तलवार,फरसा से लैस चौक के जाम कैलै रहे।तही बीच में आतातायी एसडीओ हरदीप नारायण सिंह अपन टीम के साथ पहुंचल। आंदोलनकारी और उत्तेजित हो गेल। यही बीच में अंग्रेजी सरकार के इंस्पेक्टर राममूर्ति झा आंदोलन के कुचले के लेव अपन पिस्तौल से हवाई फायरिंग करे लागल। आंदोलनकारी अइसे भड़क गेल। अइ बीच में रामफल मंडल इंस्पेक्टर राममूर्ति के हाथ से झपट्टा मार के पिस्तौल छीन ले लेलक। आंदोलनकारी इंस्पेक्टर से जुझे लागल।
तब वीर रामफल मंडल सभसे पहिला वार फरसा से एसडीओ हरदीप नारायण सिंह के गर्दन पर कैलन।छपाक के आवज गर्दन कट के लटक गेल आ खून के फव्वारा फूट पड़ल।लहू से रामफल मंडल नहा गेल।लगैय जेना अंग्रेजी हुकूमत से खून के होली खेललन हैय। आंदोलनकारी डंडा भाला फरसा से इंस्पेक्टर राममूर्ति झा, हवलदार श्यामलाल सिंह आ चपरासी दरवेशी सिंह के भी मार देलन। भीड़ के फायदा उठा के चपरासी आदित्य राम भाग गेल।

वीर रामफल मंडल एसडीओ हरदीप नारायण सिंह के लाश आ आंदोलनकारी सब इंस्पेक्टर राममूर्ति झा, हवलदार श्यामलाल सिंह आ चपरासी दरबेशी सिंह के लाश के अपना कंधा पर उठा के बगल के अधवारा नदी में विसर्जित कै देलक। आंदोलनकारी भारत माता के जय बोलैत रहे।अइ तरह से देश के आजादी के आंदोलन के बाधक देश के आंतरिक दुश्मन के अंत भे गेल।

भाग के चपरासी आदित्य राम सीतामढ़ी मजिस्ट्रेट कोर्ट में पहूंचल आ रामफल मंडल, बाबा नरसिंह दास एवं तीन चार सौ अज्ञात पर हत्या केश नं-473/42 का मुकदमा कर देलक।अइ हत्याकांड के बाद अंग्रेज कलेक्टर आ पदाधिकारी सिपाही सभ के साथ बाजपट्टी में अत्याचार आ अनाचार करे लागल। रामफल मंडल आ आंदोलनकारी के घर में आग लगा के घर के राख कै देवकी। बहु बेटी के इज्जत से खेले लागल। बुझावन ठाकुर संगे बहुत लोग के गिरफ्तार कर लेलक। बनगांव जानकी सिंह के दरवाजे पर गोली मार देलक। प्रदीप सिंह के काला पानी भेज देलक। बहुत से लोग नेपाल भाग गेल।

रामफल मंडल अपना परिवार के सुरक्षा के लेल अपना बड़का भाई के ससुरार लछमिनिया, नेपाल में रखे चल गेलन। ससुर नंदु अधिकारी संरक्षण देलन।वीर रामफल मंडल कहलन कि हमरा पत्नी के सुरक्षित राखू।हम त भारत माता के आजादी के लेल अपन देश भारत जायब।नंदु अधिकारी बहुत रोकलन।परंच आजादी के दिवाना के छिपना रूकना मंजूर न रहे।10 दिन बाद मधुरापुर आ गेलन।डरल लोग सभ कहे लागल-भाग जा रामफल। एसडीओ, इंस्पेक्टर, पुलिस आ चपरासी के मारे मे तोरे हाथ हौव।तू पकड़ा जैयबा।भाग जा रामफल।भाग जा।
वीर रामफल कहलन-हम कोनो चोरी डकैती न कैली हैय।हम देश के लेल,लोग के भलाई के लेल,अमन आ सुख चैन के लेल अंग्रेजी मुलाजिम के मार ली हैय।जेल आ फांसी के लेल हम तैयार छी। हमरा न चिंता हैय,न डर हैय,न भय हैय।

बाजपट्टी हत्याकांड के बाद25 अगस्त 1942के दिन आंदोलनकारी आ अंग्रेजी पुलिस के झड़प में चरौत में चरौत के भदई कबारी शहीद हो गेलन। पुपरी में सहदेव साह, महावीर गोप,बहेरा के रामबुझावन ठाकुर शहीद भे गेलन। हरिहरपुर के रामलगन सिंह, राम स्वार्थ सिद्ध,रामचरण मंडल,झगरू मंडल, रामस्वरूप सिंह लोगन नेपाल में भूमिगत हो गेलन।

29अगस्त1942के दिन रीगा रेवासी में मथुरा मंडल शहीद हो गेलन। राजाराम मंडल, लीला मंडल,रक्टू मंडल,सूरज कुर्मी, बंगाली मंडल, यमुना मैहता, नंदलाल मेहता,बुनीलाल राय, सहदेव राय, सुंदर मेहता,नेबी मंडल संगे दर्जनों आंदोलनकारी घायल हो गेलन।
रीगा स्टेशन पर रेल पटरी उखाड़ैत बेर में पुलिस गोली से मौजें झा आ सुखराम महरा शहीद हो गेलन।नूनू मियां घायल आ बाद में शहीद भे गेलन।
30अगस्त1942के दिन तरियानी छपरा (शिवहर) में पुलिस आ आंदोलनकारी के लड़ाई में बलदेव सूंड़ी,सुखन लोहार,वंशी ततमा,परसत साह, सुंदर महरा,छठू कानू,जयमंगल सिंह,भूपन सिंह आ नौजाद सिंह शहीद भे गेलन।बिकन कुर्मी,बुधन कहार,बुझावन चमार, मुक्ति सिंह, गुलजार सिंह,रामेश्वर सिंह, बंगाली नुनिया,मौजे सूढ़ी,चुल्हाई ठाकुर, रामलोचन सिंह, रामदेव सिंह,रामपुकार ततमा, राजेंद्र धानुक,गुगुल धोबी,पुरन सिंह आ दर्जन आंदोलनकारी घायल हो गेलन।

06सितम्बर 1942के दिन वीर रामफल मंडल गिरफ्तार कैल गेलन।छह महीना डुमरा सीतामढ़ी जेल में रहला के बाद हुनका सेन्ट्रल जेल भागलपुर भेज देलक। ग्रामीण जनक मंडल, सहोदर भाई महंथ मंडल खुशी से जेल में रामफल मंडल के बतैलक रामफल तोरा एकटा पूत्र रत्न प्राप्त भे लो हैय।हंसैत वीर रामफल मंडल कहलक-आबि हमरा फांसी मिल जायत।अब हम घर पर न लौट पायब।

आठ महीना बाद हुनकर पुत्र के देहांत भे गेल। घरवाला इ सूचना वीर रामफल मंडल के न देलक।

भागलपुर कोर्ट में 12,13,14 अगस्त1943के लगातार बहस भेल।वीर रामफल मंडल के बचाव पक्ष में तीन नामी वकील के बहस करे ला प्रांतीय कांग्रेस कमिटी भेज ले रहे। वकील सभ वीर रामफल मंडल के सुझाव देलक-कोर्ट में जज के सामने कहब,हम न मार ली हैय। संदेह के लाभ में अंहा बच जायब। परंच जौं जज पूछलक – रामफल मंडल तूं एसडीओ के मार ला ।वकील के सुझाव के ठुकरा के वीर क्रांतिकारी रामफल मंडल कहलक-हं। हजूर।पहिला फरसा हम ही मार लियै।

जिला जज, वीर रामफल मंडल के फांसी के सजा सुनैल कै।

23 अगस्त 1943 के भोर04 बजे भारत के वीर सपूत रामफल मंडल हंसैत हंसैत फांसी के फंदा के चूम लेलन।

फांसी के फंदा चूमे से पहिले हुनका से अंतिम इच्छा पुछल गेल रहे त वीर रामफल मंडल कहलन-अंग्रेज सभ हमर देश छोड़ कर चल जाय आ हमर प्राण से भी प्यारा देश आजाद हो जाय।

अगस्त क्रांति के वीर शहीद के नाम तत्कालीन जिला मुजफ्फरपुर के टावर में स्वर्णाकित हैय।आ सीतामढ़ी जिला के बाजपट्टी चौक पर के टावर में आदमकद मूर्ति प्रतिष्ठापित हैय।जे आइ भारत के संतान के भारत के आजादी के अक्षुण्ण रखे के संदेश दे रहल हैय।

हिंदी के एकटा कविता अंश के रूप में-

हम लायें हैं तूफान से
किश्ती निकाल के,
इस देश को रखना,
मेरे बच्चे संभाल के।

हमरा सभ के अइसन वीर क्रांतिकारी, फांसी के फंदा के चूमे वाला शहीद रामफल मंडल पर गर्व हैय।

स्वरचित © सर्वाधिकार रचनाकाराधीन
रचनाकार-आचार्य रामानंद मंडल, सामाजिक चिंतक।
मुरलियाचक (गौशाला चौक) वार्ड नंबर-04 सीतामढ़ी।
पोस्ट-चकमहिला जिला-सीतामढी पिन-843302
मो नं-9973641075

Language: Maithili
Tag: लेख
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