Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Oct 2023 · 1 min read

विचार

विचार

जीवन के प्रत्येक क्षण को जीवंत बनाए रखने का एकमात्र उपाय है कि आप स्वयं को किस हद तक दूसरों के हित उपयोग करते हैं l

अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

2 Likes · 419 Views
Books from अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
View all

You may also like these posts

नाता(रिश्ता)
नाता(रिश्ता)
पं अंजू पांडेय अश्रु
खत्म न हो सकी कभी
खत्म न हो सकी कभी
Dr fauzia Naseem shad
सच कहना जूठ कहने से थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि इसे कहने म
सच कहना जूठ कहने से थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि इसे कहने म
ruby kumari
*मोती बनने में मजा, वरना क्या औकात (कुंडलिया)*
*मोती बनने में मजा, वरना क्या औकात (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
राजनीति का नाटक
राजनीति का नाटक
Shyam Sundar Subramanian
हत्या
हत्या
Kshma Urmila
अपना सब संसार
अपना सब संसार
महेश चन्द्र त्रिपाठी
"इन्तजार"
Dr. Kishan tandon kranti
■ आज का शेर...।।
■ आज का शेर...।।
*प्रणय*
"अनुरोध"
DrLakshman Jha Parimal
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
सम्भाला था
सम्भाला था
भरत कुमार सोलंकी
संसार एक जाल
संसार एक जाल
Mukesh Kumar Sonkar
रावण दहन
रावण दहन
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
तेजधार तलवार से, लड़कियों के चक्कर से, जासूसों और चुगलखोर से
तेजधार तलवार से, लड़कियों के चक्कर से, जासूसों और चुगलखोर से
Rj Anand Prajapati
रूठना तो हमे भी आता हैं..लेकिन मनाने कहा कोई आता हैं..
रूठना तो हमे भी आता हैं..लेकिन मनाने कहा कोई आता हैं..
Swara Kumari arya
*सत्य राह मानव की सेवा*
*सत्य राह मानव की सेवा*
Rambali Mishra
#नवजीवन
#नवजीवन
वेदप्रकाश लाम्बा लाम्बा जी
तेरे जन्म दिवस पर सजनी
तेरे जन्म दिवस पर सजनी
Satish Srijan
अज़ीम हिन्दुस्तान ...
अज़ीम हिन्दुस्तान ...
SURYA PRAKASH SHARMA
मन   पायेगा   कब   विश्रांति।
मन पायेगा कब विश्रांति।
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
आसानी से कोई चीज मिल जाएं
आसानी से कोई चीज मिल जाएं
शेखर सिंह
कविता -
कविता - "सर्दी की रातें"
Anand Sharma
परिस्थिति और हम
परिस्थिति और हम
Dr. Rajeev Jain
بن بلاۓ ادھر گئے ہوتے
بن بلاۓ ادھر گئے ہوتے
अरशद रसूल बदायूंनी
कहती है नदी
कहती है नदी
Meera Thakur
यकीं के बाम पे ...
यकीं के बाम पे ...
sushil sarna
एक खत जिंदगी के नाम
एक खत जिंदगी के नाम
पूर्वार्थ
फसल
फसल
Bodhisatva kastooriya
क़िस्मत का सौदा करने चली थी वो,
क़िस्मत का सौदा करने चली थी वो,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
Loading...