*”माँ सिद्धिदात्री “*
“माँ सिद्धिदात्री”
वात्सल्य रस
अष्ट सिद्धि नव निधि की अधिष्ठात्री ,
हे जगजननी शुभ मंगल आनंद करणी।
अष्टभुजा माँ शक्ति स्वरूपिणी
भयनाश भवतारिणी भयहारिणी।
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अष्टभुजा शंख चक्र गदा पुष्प पद्मवासिनी
बल बुद्धि विद्या यश कीर्ति सुख प्रदायिनी।
समस्त शक्तियों की मूलाधर निवासिनी ,
सिंहवाहिनी आलौकिक दिव्य शिव पटरानी।
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अणिमा महिमा लघिमा गरिमा प्राप्ति ,
प्राक्राम्य ईशित्व वशित्व आठ सिद्धियां ब्रम्हवैवर्त पुराण नाम प्रदायिनी।
धर्म अर्थ काम मोक्ष मोक्षदायिनी
भक्ति का वरदान स्नेह अमृत सुधा वात्सल्य रूप सुख दायिनी।
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हलवा पूरी चना भोग लगाये ,
आस्था श्रद्धा भक्ति से अंतर्ज्योति जलाएं।जप जप तप आराधना स्मरण मात्र से
साधक पूर्ण सिद्धि मनोवांछित फल पाएं।
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दुःखों से छुटकारा पाने माँ का वरदान करुणा दायिनी।
चराचर जगत में निर्लिप्त सुख आनंद देने वाली सुखदायिनी।
मनोकामनाएं पूर्ण कर सुख समृद्धि संपूर्ण कल्याण शौर्य शालिनी।
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कृपामयी कृपा करो ,दयामयी दया करो विनती करो स्वीकार।
संकटों से मुक्त करो हे ..माँ सिद्धिदात्री तेरी महिमा है अपार।
क्षमामयी क्षमा करो ,जगत में सबकी यही करुण पुकार।
कृपा भरी सदृष्टि से माँ सिद्धिदात्री एक बार तो निहार।
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सर्वत्र व्याप्त जगत में जगतारिणी
हाथ जोड़ शीश झुकाती*शशि*खड़ी हुई,
अदृश्य शक्ति दिव्य प्राण वायु दे भयहारिणी भव सागर तारिणी।
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या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
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शशिकला व्यास✍️