Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Nov 2024 · 1 min read

निहारिका साहित्य मंच कंट्री ऑफ़ इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट के द्वितीय वार्षिकोत्सव में रूपेश को विश्वभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया

निहारिका साहित्य मंच कंट्री ऑफ़ इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट का द्वितीय वार्षिकोत्सव भव्य तरीके से उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निराला सभागार में सम्पन्न हुआ। संस्थापिका डॉ रीमा सिन्हा एवं अध्यक्ष डॉ अब्दुल अज़ीज़ सिद्दीक़ी द्वारा आयोजित किया गया। पद्मश्री डॉ विद्या बिंदु सिंह एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुल्तान शाकिर हाशमी, मुख्य अतिथि आईएएस अधिकारी श्री हरि ओम, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार श्री मुकुल महान, पत्रकार एसोसिएशन के महामंत्री एवं विशिष्ट अतिथि जनाब अब्दुल वहीद, विशिष्ट अतिथि,प्रसिद्ध ग़ज़लकार एवं साहित्यकार मोहम्मद अली साहिल,सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक डॉ उमंग खन्ना (विशिष्ट अतिथि),विशिष्ट अतिथि डॉ अमिता दुबे, वी बी पाण्डेय, डॉ सुल्तान शाकिर हाशमी जी, भाजपा नेत्री फरहा रिज़वी के हाथों युवा साहित्यकार शिक्षक, समाजसेवी रूपेश कुमार ने अपनी कविता ‘पिता क्या है’ से पिता की यादों को तरोताजा कर दिए साथ ही संस्था की ओर से रूपेश को ‘विश्व भूषण सम्मान-2024’ से सम्मानित किया गया। रूपेश की चार एकल संग्रह एव अनेकों पत्र – पत्रिकाओं में कविता, लेख छप चुकी है। इनको अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है जिसमें कबीर कोहिनूर सम्मान, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, एकल्वयम शिक्षक सम्मान, भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी सम्मान, पिता पालनकर्ता सम्मान, भारती ज्योति सम्मान, अभ्युदय सम्मान इत्यादी। कार्यक्रम के अंत में सभी ने राष्ट्रगान गया। शाम 4 बजे से आरम्भ हुआ यह आयोजन रात्रि भोज के साथ समाप्त हुआ। मंच अध्यक्ष डॉ अज़ीज़ सिद्दीक़ी एवं संस्थापिका डॉ रीमा सिन्हा ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।

1 Like · 1 Comment · 57 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
चुनावी मौसम
चुनावी मौसम
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
मां
मां
जितेन्द्र गहलोत धुम्बड़िया
" बीकानेरी रसगुल्ला "
Dr Meenu Poonia
कहते- कहते रह गया,
कहते- कहते रह गया,
sushil sarna
जीवन पर
जीवन पर
Dr fauzia Naseem shad
वक्त सबको पहचानने की काबिलियत देता है,
वक्त सबको पहचानने की काबिलियत देता है,
Jogendar singh
कभी कभी
कभी कभी
Sûrëkhâ
" लेकिन "
Dr. Kishan tandon kranti
मित्रता स्वार्थ नहीं बल्कि एक विश्वास है। जहाँ सुख में हंसी-
मित्रता स्वार्थ नहीं बल्कि एक विश्वास है। जहाँ सुख में हंसी-
Dr Tabassum Jahan
माँ सच्ची संवेदना...
माँ सच्ची संवेदना...
डॉ.सीमा अग्रवाल
ए चांद आसमां के मेरे चांद को ढूंढ ले आ,
ए चांद आसमां के मेरे चांद को ढूंढ ले आ,
इंजी. संजय श्रीवास्तव
सलाम
सलाम
Dr.S.P. Gautam
"Looking up at the stars, I know quite well
पूर्वार्थ
मस्त बचपन
मस्त बचपन
surenderpal vaidya
क्यों दोष देते हो
क्यों दोष देते हो
Suryakant Dwivedi
■ सुरीला संस्मरण
■ सुरीला संस्मरण
*प्रणय*
23, मायके की याद
23, मायके की याद
Dr .Shweta sood 'Madhu'
जज्बात की बात -गजल रचना
जज्बात की बात -गजल रचना
Dr Mukesh 'Aseemit'
बाप अपने घर की रौनक.. बेटी देने जा रहा है
बाप अपने घर की रौनक.. बेटी देने जा रहा है
Shweta Soni
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelofar Khan
ये दिल तेरी चाहतों से भर गया है,
ये दिल तेरी चाहतों से भर गया है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
अकेले चलने की तो ठानी थी
अकेले चलने की तो ठानी थी
Dr.Kumari Sandhya
बड़ा गहरा रिश्ता है जनाब
बड़ा गहरा रिश्ता है जनाब
शेखर सिंह
ऑंधियों का दौर
ऑंधियों का दौर
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
जीवन में...
जीवन में...
ओंकार मिश्र
23/184.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/184.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बारिश की मस्ती
बारिश की मस्ती
Shaily
*सूने पेड़ हुए पतझड़ से, उपवन खाली-खाली (गीत)*
*सूने पेड़ हुए पतझड़ से, उपवन खाली-खाली (गीत)*
Ravi Prakash
वासना और करुणा
वासना और करुणा
मनोज कर्ण
आसाँ नहीं है - अंत के सच को बस यूँ ही मान लेना
आसाँ नहीं है - अंत के सच को बस यूँ ही मान लेना
Atul "Krishn"
Loading...