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May 17, 2016 · 1 min read

तेरे बिन

आंखों से आंखों की भाषा पढ़ लेता हूँ
तुझको पाने की अभिलाषा कर लेता हूँ

जीवन गठरी धीरे धीरे रीत रही है
असमंजस के जोङ गुणा में बीत रही है

आएगी तू प्रतिदिन आशा कर लेता हूं
तुझको पाने की अभिलाषा कर लेता हूँ।।

अपना सब कुछ तुझ पर मैं न्यौछावर कर दूं
तेरे मन की इच्छाओं की गागर भर दूं

तू क्या सोचे मैं जिज्ञासा कर लेता हूँ
तुझको पाने की अभिलाषा कर लेता हूँ।।

मिल जाए तू जीवन को मंजिल मिल जाए
सूना सूना मेरा घर आंगन खिल जाए

जीवन की नव नव प्रत्याशा कर लेता हूं
तुझको पाने की अभिलाषा कर लेता हूँ।।

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