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का कहीं लोर के

का कहीं लोर के
■■■■■■■■
जिन्दगी में जहर बा गइल घोर के
बन्द होते न बा का कहीं लोर के

ना ये पार में ना ओ पार में
जुदाई भइल उहो मझधार में
गलती हमरे रहे आकि चितचोर के-
बन्द होते न बा का कहीं लोर के…

बेवफाई के उ पार कइले बा हद
इहे सोच के दिल में उठे दरद
जे जोरल उहे तूरल नरम डोर के-
बन्द होते न बा का कहीं लोर के…

ई खा के कसम खिया के कसम
केहू दी ना कबो प्यार में कवनों गम
खून कइलसि बेदर्दी पोरे पोर के-
बन्द होते न बा का कहीं लोर के…

– आकाश महेशपुरी

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