Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Feb 2024 · 1 min read

अपना कोई नहीं है इस संसार में….

अपना कोई नहीं इस संसार में,
लगता है कि ये उम्र बीत जायेगी किसी अपने के इंतजार में।

कांटो के बदले भी फूल ही दिए हमने,
पता नहीं क्या कमी रह गई मेरे प्यार में।

जले पर मरहम नहीं नमक लगाते हैं लोग,
यही दस्तूर है दुनिया के बाजार में।

पता है कोई नहीं आएगा दर्द बांटने मेरा
फिर क्यों बैठे हैं हम यहां बेकार मैं?

रंगहीन सा लगता है जग सारा,
पतझड़ ही नजर आता है मुझको अब तो हर बहार में।

Language: Hindi
1 Like · 85 Views

You may also like these posts

श्री बिष्णु अवतार विश्व कर्मा
श्री बिष्णु अवतार विश्व कर्मा
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
मुझे लगा कि तुम्हारे लिए मैं विशेष हूं ,
मुझे लगा कि तुम्हारे लिए मैं विशेष हूं ,
Manju sagar
एक लम्हे में
एक लम्हे में
Minal Aggarwal
आज़ पानी को तरसते हैं
आज़ पानी को तरसते हैं
Sonam Puneet Dubey
पैसा
पैसा
Mansi Kadam
नववर्ष अभिनंदन
नववर्ष अभिनंदन
Neha
4484.*पूर्णिका*
4484.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कहावत है कि आप घोड़े को घसीट कर पानी तक ले जा सकते हैं, पर म
कहावत है कि आप घोड़े को घसीट कर पानी तक ले जा सकते हैं, पर म
इशरत हिदायत ख़ान
कोई नहीं किसीका
कोई नहीं किसीका
Abasaheb Sarjerao Mhaske
सही गलत की पहचान करना सीखें
सही गलत की पहचान करना सीखें
Ranjeet kumar patre
चाँद से मुलाकात
चाँद से मुलाकात
Kanchan Khanna
जिनको हमसे रहा है प्यार नहीं
जिनको हमसे रहा है प्यार नहीं
आकाश महेशपुरी
"कहने को हैरत-अंगेज के अलावा कुछ नहीं है ll
पूर्वार्थ
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आपस की गलतफहमियों को काटते चलो।
आपस की गलतफहमियों को काटते चलो।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
*चलो नहाऍं आज चाँदनी में घूमें हम दोनों (मुक्तक)*
*चलो नहाऍं आज चाँदनी में घूमें हम दोनों (मुक्तक)*
Ravi Prakash
" गाड़ी चल पड़ी उसी रफ्तार से "
DrLakshman Jha Parimal
ग़म का लम्हा, तन्हा गुज़ारा किजिए
ग़म का लम्हा, तन्हा गुज़ारा किजिए "ओश"
ओसमणी साहू 'ओश'
शेर
शेर
पाण्डेय नवीन 'शर्मा'
अस्तित्व
अस्तित्व
Kapil Kumar Gurjar
सुप्रभात
सुप्रभात
*प्रणय*
ससुराल में साली का
ससुराल में साली का
Rituraj shivem verma
तेरी बेरुखी इस कदर
तेरी बेरुखी इस कदर
Chitra Bisht
हमसफ़र
हमसफ़र
Arvina
ग़ज़ल _ रोज़ तन्हा सफ़र ही करती है ,
ग़ज़ल _ रोज़ तन्हा सफ़र ही करती है ,
Neelofar Khan
गीत- नज़र को भा गये जानां
गीत- नज़र को भा गये जानां
आर.एस. 'प्रीतम'
सुलह
सुलह
इंजी. संजय श्रीवास्तव
कहां से लाऊं शब्द वो
कहां से लाऊं शब्द वो
Seema gupta,Alwar
कल तो नाम है काल का,
कल तो नाम है काल का,
sushil sarna
मजदूर दिवस की औपचारिकता
मजदूर दिवस की औपचारिकता
Sudhir srivastava
Loading...