Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jul 2023 · 1 min read

🪸 *मजलूम* 🪸

🤔रास्ते पर, दुकान,ठेले, ढाबे पर कुछ असामाजिक तत्व बैठे रहते हैं ,अकेली लड़की रोड़ पर पैदल निकलती है तो उसे निम्न माध्यम से उकसाने का प्रयास करते हैं । और वह अबला स्वतः ही मजलूम बन जाती है।👰🏻‍♀
🪸 मजलूम 🪸

मैं अभागन इस दौर में
हवा ने आँचल उड़ायी।
धूल भी पत्थर बरसाते
अबला हूँ दया नहीं आयी।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁
कुछ पौंधे राह खड़े
पत्तों से ठहाके लगाते हैं।
बैठी हुई चिड़िया उस मन की
चिल्लाकर मुझे सताते हैं ।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁
बारिश सी मदिरा को देखो
भय से ठिठुर जाती हूँ।
सर्द हवा मुझे छेड़ती
पागल सी सिहर जाती हूँ।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁
रोको चूल्हे की आग को
चिलम का कस लगाता है।
बर्तन भी तो है दरिंदे
देख सीटी बजाता है।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁
जगह-जगह ठेले के मेले
कर्कश धुन कई गाते हैं।
यौवन कपड़ा ढका है तन पर
सरगोसी से मुझे उकसाते हैं।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁
देखो” इन्द्र “अभी के पौंधे
कांटे की जुबान लड़ाते हैं ।
मैं समेटती कपड़े बालों को
ऐसे ही तूफ़ान रोज आते हैं।

🔥सुरेश अजगल्ले “इन्द्र”🔥

Language: Hindi
2 Likes · 218 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
माँ-बाप
माँ-बाप
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
स्त्री:-
स्त्री:-
Vivek Mishra
ना जाने क्यों ?
ना जाने क्यों ?
Ramswaroop Dinkar
दिल है के खो गया है उदासियों के मौसम में.....कहीं
दिल है के खो गया है उदासियों के मौसम में.....कहीं
shabina. Naaz
गंणपति
गंणपति
Anil chobisa
तीजनबाई
तीजनबाई
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
तुम पतझड़ सावन पिया,
तुम पतझड़ सावन पिया,
लक्ष्मी सिंह
तोड़कर दिल को मेरे इश्क़ के बाजारों में।
तोड़कर दिल को मेरे इश्क़ के बाजारों में।
Phool gufran
पुश्तैनी मकान.....
पुश्तैनी मकान.....
Awadhesh Kumar Singh
पिछले पन्ने 10
पिछले पन्ने 10
Paras Nath Jha
सच का सच
सच का सच
डॉ० रोहित कौशिक
भाव - श्रृँखला
भाव - श्रृँखला
Shyam Sundar Subramanian
बढ़े चलो तुम हिम्मत करके, मत देना तुम पथ को छोड़ l
बढ़े चलो तुम हिम्मत करके, मत देना तुम पथ को छोड़ l
Shyamsingh Lodhi Rajput (Tejpuriya)
अपूर्ण नींद और किसी भी मादक वस्तु का नशा दोनों ही शरीर को अन
अपूर्ण नींद और किसी भी मादक वस्तु का नशा दोनों ही शरीर को अन
Rj Anand Prajapati
*
*"प्रकृति की व्यथा"*
Shashi kala vyas
सच में शक्ति अकूत
सच में शक्ति अकूत
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
"जुबां पर"
Dr. Kishan tandon kranti
*मंत्री जी भी कभी किसी दिन, ई-रिक्शा पर बैठें तो (हिंदी गजल-
*मंत्री जी भी कभी किसी दिन, ई-रिक्शा पर बैठें तो (हिंदी गजल-
Ravi Prakash
अपना यह गणतन्त्र दिवस, ऐसे हम मनायें
अपना यह गणतन्त्र दिवस, ऐसे हम मनायें
gurudeenverma198
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
अजीब शौक पाला हैं मैने भी लिखने का..
अजीब शौक पाला हैं मैने भी लिखने का..
शेखर सिंह
2668.*पूर्णिका*
2668.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मिटे क्लेश,संताप दहन हो ,लगे खुशियों का अंबार।
मिटे क्लेश,संताप दहन हो ,लगे खुशियों का अंबार।
Neelam Sharma
कहते  हैं  रहती  नहीं, उम्र  ढले  पहचान ।
कहते हैं रहती नहीं, उम्र ढले पहचान ।
sushil sarna
पीड़ित करती न तलवार की धार उतनी जितनी शब्द की कटुता कर जाती
पीड़ित करती न तलवार की धार उतनी जितनी शब्द की कटुता कर जाती
Sukoon
प्रयास
प्रयास
Dr fauzia Naseem shad
नाम कमाले ये जिनगी म, संग नई जावय धन दौलत बेटी बेटा नारी।
नाम कमाले ये जिनगी म, संग नई जावय धन दौलत बेटी बेटा नारी।
Ranjeet kumar patre
भारत माता की वंदना
भारत माता की वंदना
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
राजे तुम्ही पुन्हा जन्माला आलाच नाही
राजे तुम्ही पुन्हा जन्माला आलाच नाही
Shinde Poonam
Loading...