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20 May 2022 · 3 min read

🌺प्रेम की राह पर-52🌺

तुम्हारी कल्पित भावना सदा तुम्हारे जीवन में तिमिर ही प्रस्तुत करेगी।तुम अपने विचारों के घने अरण्य में स्व जीवन को भोग रही हो।यह सब तुम्हारा एकतरफा कृत्य है।तुम दूसरे के प्रति अपने छुद्र विचारों की बगिया कुछ जल्दी ही लगाना शुरू कर देती हो।यह सब तुम्हारा, स्वयं का मोह भंजक कार्यक्रम है।सीमित जीवन जीने से पुनः पुनः लोभ का व्यापार बढ़ता है।अध्ययन का अभिप्राय तब सिद्ध होता है जब वह उस लक्ष्य को प्राप्त करले।अन्यथा धूल में लठ्ठ मारते रहो।तो तुम भी ऐसे ही धूल में लठ्ठ मारती रहना और करती रहना ताता थईया।क्यों पता है?तुम सीमित हो चुकी हो और ऐसे ही और अधिक सीमित होती जाना।तुम विषयी हो चुकी हो।तुम्हारे अन्तःकरण में भय की सदैव उपस्थिति है।क्योंकि तुम इस प्रकार टपोरीगिरी तो करते हो और परिवारी जन न देख लें यह भी चाहते हो।ऐसा है तुम्हारा झूठा संसार।तुम हो धोखा गर्ल।अपने धोखे की तिनिक तिनिक धिन धा करती रहना है।संसार का हर अच्छा बुरा कर्म कुएँ की आवाज़ की तरह है।तुम जैसी कर्म दूसरों को दोगे वैसी ही आवाज़ निकलेगी।तुम्हारे तरन्नुम तुम ही गुन गुनाओ ऐसे ही सिमट जाएगी तुम्हारी जिन्दगी।तुम रेडियो की तरह अपनी फ्रीक्वेंसी मिलाती रहना और यहाँ मैंने अपना आकाशवाणी केन्द्र की विद्युत बन्द कर दी है।तो तुम्हारे रेडियो की फ्रीक्वेंसी अब कभी नहीं मिलेगी।अब तुम ही फोन करना।पता है तुम लोमड़ी हो।कैसी जिसके खाज हो जाने से बाल उड़ गए हैं और उसके इतनी खुजली होती है कि दीवारों के किनारों से अपनी पीठ खुजाती रहती है।मेरी दीवार पर आएगी।तो डंडा दूँगा पीठ पर।हे पों पों।तुम ऐसे ही रहना।जिससे हो जाएगी तुम्हारी टाँय टाँय फिस्स।प्रेम की धरा क्या तुम्हारे उलाहनों से हरी भरी होगी।कभी नहीं।तुम बिष के बीज बो रही हो।जो निश्चित ही फलित होंगे और वे मुझमें विष का संचार थोड़े ही करेंगे वे तुम्हें ही विष का घूँट पिलाएंगे।तुम फिर तड़पना।तुम झींगुर हो और ऐसे ही झिरझिराती रहना।हे दोनाली!तुम्हारे सब फायर मिस हो जायेंगे।तुम ऐसे ही अपनी बेरोजगारी के प्रमाण देती रहना।हाँ,मेरे पास एक फावड़ा रखा है।उसे ले लेना और खोदना घास।तुम्हारे सभी प्रमाण ऐसे नष्ट हो जायेंगे।जैसे आग में रुई।तुम अपने को ज़्यादा होशियार समझती हो तो सामना करो।पीछे से ऐसे ही फालतू के सन्देश भेजती रहना।तुम काली बिल्ली हो।ऐसे ही अपनी आँखें अँधेरे में भी चमकाती रहना।हे घण्टू!तुम ऐसे ही घण्टागीरी सिद्ध करती रहना।तुम्हारे फालतू सुन्दरता की रश्मियाँ झुर्रियों से सामना करने ही वाली हैं।तो ग्रीवा की चमड़ी भी ऐसे ही लटक कर झूला झूलेगी।तो चिपटे गालों की लालिमा झुर्रियों तथा खून की कमी वाले धब्बों के साथ घृणा को जन्म देगी।तुम्हारे दाँत घोड़े की तरह बदबू उत्पन्न करेंगे।छिं छिं।तुम्हारे होटों से लालिमा ऐसे नष्ट हो जायेंगी जैसे बंदर के नितम्बों से वृद्धावस्था में नष्ट हो जाती है।तुम कोयल हो काली पर उसके पास कुहू कुहू नहीं है।काउं काउं है।तुम बंदरिया हो जिसकी पूँछ कट चुकी है।तो वह खम्बे पर चढ़ती हुई कैसी लगेगी।सोच लो।इसे अब विनोद न समझना तुम ऐसे ही अपने जीवन में आने वाले अज्ञात भय से अभी परिचित नहीं हो।हे टूटी चारपाई!तुम ऐसे ही घर के कोने में पड़ी रहो।भिज्ञ होकर भी किसी पुरूष को नाम मात्र मान लेना अनुचित है और यह तुम्हारी उदण्डता को सिद्ध करता है।तुम,मैं फिर कह रहा हूँ नाबालिगों की फ़ौज से घिरी हुई हो।ऐसे ही तुक्के से अपनी वीणा बजाती रहना।तुम ऐसे ही बे-वज़ह अपने घटिया सिद्धांतों को प्रस्तुत करतीं रहना।हे खराब खुपड़िया!तुम ऐसे ही अपने खुरापाती कारनामों की रेलगाड़ी अपने मातापिता के दिये हुये संस्काररूपी ईंधन से और अपनी मूर्खता के स्नेहक से चलाती रहना और हॉर्न के रूप में बजाती रहना झुनझुना।तुम वास्तविक निर्दयी हो।क्यों कि तुम्हारी निर्दयता में दयालुता का जरा सा भी पुट नहीं है।ऐनक के पीछे तुम्हारी आँखे ऐसे डिमडिमाती हैं जैसे कौआ अपने भोजन की तलाश में डिम डिमाता है।तुम अनिवार्यतः मूर्ख हो।महामूर्ख।रोटी खाने को मिलती नहीं है तो कुपोषित होने।के लक्षण अब तुम्हारे दिमाग पर भी दिखाई देते हैं।ऐसे ही अपनी मूर्खतापूर्ण बुद्धिमत्ता और चूजों से सहयोग की भावना को प्रदर्शित करती रहना।क्यों पता है।तुम सर्टिफाइड मूर्ख हो।जो लोग तुम्हारे आस पास रहते हैं उन्हें सावधान कर देना।कहीं वे भी पागल मूर्ख न हो जायें।क्यों कि तुम मूर्ख जो हो।

©अभिषेक: पाराशरः

Language: Hindi
409 Views
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