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3 Dec 2022 · 1 min read

✴️🌸सहस्त्रं तु पितृन्माता गौरवेणातिरिच्यते🌸✴️

गृहस्थाश्रम: सर्वस्य मूल:।गृहस्थाश्रमे भगिनी च माता च मुख्य: यतः एतस्य कारणेन एव गृहस्थ: कथ्यते।साधूनां मठ: आश्रम: धाम: च आदयः के अपि गृहं न कथयति।नार्याः कारणेन गृह: कथयति।यथा वृक्षस्य अधः एव किं न निवसति।’न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते'(महाभारत, शान्ति०144/6)।अधुना स्त्रीं केवलं भोग-सामिग्री: मन्यते।स्त्रीं स्त्रीरुपेण दर्शनम् एतस्य निरादर:।एतं मातृरूपेण दर्शनं करोतु।मातु: स्थानं बहु उच्चै:-‘सहस्त्रं तु पितृन्माता गौरवेणातिरिच्यते'(मनु०2/145)।
©®अभिषेक: पाराशरः

Language: Sanskrit
153 Views
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