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24 Sep 2022 · 1 min read

✍️काही आठवणी स्मरतांना

मनाला चेटुक
करणाऱ्या
हव्याहव्याशा
काळजाच्या
गाभार्यात घर
करणाऱ्या
गावातल्या
कथा असतात

वर्दळीच्या
रस्त्यात भान
हरपणाऱ्या
जीवाच्या
आकांताने
धावणाऱ्या
शहराच्या
व्यथा असतात

गांव कसं
कुडकुडत असतं
आणि शहर
थरथरत असतं

मात्र कधी कधी
कुडकुडणार
गाव शहराच्या
थरथरणाऱ्या
घट्ट विळख्यात
अडकतेय आणि
मग गावाच्या कथा
ही शहराच्याच व्यथा
बनुन जातात
नुसत्याच आठवणीला
निरंतर जागवणाऱ्या
…………………………………………//
©✍️’अशांत’ शेखर
24/09/2022

1 Like · 137 Views
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